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दो हज़ार का नोट बंद करने का फैसला अप्रत्यक्षित नोटबंदी : महिला कांग्रेस

khaskhabar.com: शनिवार, 20 मई 2023 5:13 PM (IST)
दो हज़ार का नोट बंद करने का फैसला अप्रत्यक्षित नोटबंदी : महिला कांग्रेस
चंडीगढ़ । चंडीगढ़ महिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपा दुबे ने दो हज़ार रुपए का नोट बंद करने के तरीके को अप्रत्यक्षित नोट बंदी करार दिया है। उन्होने कहा कि शुक्रवार को इसकी अधिसूचना आती है साथ में यह भी कहा जा रहा कि 30 सितम्बर तक जमा करा सकते हैं, तब तक चल सकता है। अधिसूचना भी अक्सर छुट्टी वाले शनिवार से ठीक एक दिन पहले आती है। जाहिर है अशांकित जनता बैंक की तरफ भागने पर विवश कर दी गई। दीपा ने सवाल किया है कि अधिसूचना में यह साफ किया जाता कि अगर कोई सितम्बर से पहले लीगल टेंडर नोट को लेने से इंकार करता है तो उस पर क्या कदम उठ सकते हैं। कम से कम जनता के बीच साफ संदेश तो जाना चाहिए था। मोदी सरकार क्यों देश की जनता को गुमराह और परेशान करने में लगी है। सिर्फ और सिर्फ देश के बड़े पूंजीपतियों की सहायता करने में मोदी सरकार जुटी हुई है। उन्होंने कहाकि सबसे ज्यादा पीड़ा मध्यमवर्ग और निचले वर्ग की महिलाओं को सहन करने पड़ रही है। पहले भी नोटबंदी में महिलाओं के वो पैसे निकले जो उन्होंने अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए जोड़कर रखे थे। मध्यम वर्ग में मोदी सरकार के इस फैसले से बहुत रोष है कि फिर से मोदी सरकार ने आम नागरिकों ने जो पैसा अपने परिवार और अपने बच्चों के लिए जोड़ कर रखा है। उसको फिर से दोबारा से 2000 के नोटों को बैंक में जमा कराने की लाइन में फिर से लाइन में लगना पड़ेगा।
दीपा ने कहाकि जिन बच्चों की शादी के लिए उनके मां-बाप ने पैसे इकट्ठे किए होंगे। उन पर क्या बीतेगी। लोग 2000 के नोट लेने से कतरा ने लगे हैं। दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 2016 में नोटबंदी कर कर 500 और 2000 के नोट को चलाया था। लेकिन क्या 7 साल में ही अपने ही 2000 के नोट से मोदी सरकार का विश्वास उठ गया।
मोदी सरकार और भाजपा क्यों देश के नागरिकों के साथ विश्वासघात कर रही है। दीपा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब देश की नागरिकों को ही नहीं जो विदेश में देश के बच्चे पढ़ने गए हुए हैं। उन पर भी 20% टैक्स अगर उनके मां-बाप देश से उनके लिए पैसे भेजेंगे उस पर लगाए जाएंगे। यह कहां तक वाजिब है। क्यों देश के बच्चों को उनके मां-बाप पहले की तरह पैसे नहीं भेज सकते।

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