Governor Gulab Chand Kataria Honors the Book Karmayogi Krishna with the Best Book of the Year-2024 Award -m.khaskhabar.com
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Oct 16, 2026 8:51 pm
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   राजस्थान और हरियाणा सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
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राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने ‘कर्मयोगी कृष्ण’ पुस्तक को ‘बेस्ट बुक ऑफ द ईयर-2024’ पुरस्कार से किया सम्मानित

khaskhabar.com: रविवार, 24 मई 2026 12:50 PM (IST)
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने ‘कर्मयोगी कृष्ण’ पुस्तक को ‘बेस्ट बुक ऑफ द ईयर-2024’ पुरस्कार से किया सम्मानित
चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने चंडीगढ़ साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित उत्कृष्ट कृति वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह में ‘कर्मयोगी कृष्ण’ पुस्तक को ‘बेस्ट बुक ऑफ द ईयर-2024’ पुरस्कार से सम्मानित किया। इसका लेखन हरियाणा सरकार में कार्यरत जिला सूचना एवं जनसम्पर्क अधिकारी डॉ. कृष्ण के आर्य ने किया है। इसके लिए उन्होंने चंडीगढ़ साहित्य अकादमी का आभार व्यक्त किया। राज्यपाल ने इस दौरान विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट लेखन कार्य करने वाले साहित्यकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि समाज के नवनिर्माण और नवीनीकरण में साहित्य का अहम योगदान होता है। इस प्रकार के आयोजन साहित्यिक लेखकों को रचनात्मक और अनुसंधानात्मक लेखन के लिए प्रेरित करते हैं। डॉ. आर्य ने अपनी पुस्तक ‘कर्मयोगी कृष्ण’ के विषय में जानकारी देते हुए बताया कि यह पुस्तक भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं और उनके महान चरित्र की शुद्ध अभिव्यक्ति है। वर्तमान परिदृश्य में भगवान श्रीकृष्ण मानव मात्र के पुरोद्धा है। उनके जीवन की दिव्यता से आज का समाज रोशन हो रहा है। सृष्टि के अभी तक के काल में वही एक मात्र ऐसे चरित्र रहे हैं, जिनको अनेक ऋषियों ने उत्कृष्टता प्रमाण पत्र दिया है। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने तो यहां तक कहा है कि ‘भगवान श्रीकृष्ण ने जन्म से मृत्यु पर्यन्त कभी कोई अधर्म का कार्य नहीं किया। वह एक आप्त पुरुष थे’। परन्तु इसके इतर, कुछ लोग दुर्भावनाओं से ग्रसित होकर श्रीकृष्ण के चरित्र को गदला कर रहे हैं। उनके लिए चोर, लम्पट, रसिया जैसे अनैतिक और घटिया शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं। इससे न केवल हमारी सत्य सनातन वैदिक संस्कृति के नायकों को बदनाम किया जा रहा है बल्कि विधर्मी लोगों में हम हंसी के पात्र बन रहे हैं।
डॉ. आर्य ने कहा कि इस कारण भगवान श्रीकृष्ण और हमारी सनातन संस्कृति के प्रति नकारात्मक तरंगे फैलने से पर्यावरण दूषित हो रहा है। फलतः मैंने ‘कर्मयोगी कृष्ण’ पुस्तक लेखन का कार्य आरम्भ किया, जिसमें लगभग 40 माह का समय लगा। इस पुस्तक में डेढ़ दर्जन से अधिक ग्रन्थों के संदर्भों को सम्मिलित किया गया है। यह एक अनुसंधानात्मक पुस्तक है, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य जीवन और वास्तविक घटनाक्रमों को दर्शाने का प्रयास किया है।
इस पुस्तक लेखन का मेरा उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के जीवन की महानता के हो रहे लोप को कम करना रहा है। अतः श्रीकृष्ण के विषय में ब्रह्मांड़ में फैली नकारात्मक तरंगों को न्यून करने हेतु अधिक से अधिक लोगों द्वारा इस पुस्तक का पठन किया जाना वांच्छनीय है ताकि हमारे प्राचीन ज्ञान, विज्ञान और उत्कृष्ट चरित्र की धमक से विश्व परिचित हो सके ।

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