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कैथल कोर्ट से डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों को राहत, पुलिस पर फायरिंग के मामले में 27 आरोपी बरी

सूचना मिलने के बाद एएसआई सुभाष चंद्र समेत पुलिस टीम निजी और सरकारी वाहनों से गांव कोटड़ा स्थित डेरे पर पहुंची। पुलिस का आरोप था कि वहां मौजूद भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया। शिकायत के मुताबिक, भीड़ की ओर से फायरिंग की गई और पेट्रोल से भरी बोतलें पुलिस वाहनों पर फेंकी गईं। कुछ लोगों पर तलवार, गंडासी और डंडों से पुलिसकर्मियों पर हमला करने का भी आरोप लगाया गया। इस दौरान ईएएसआई सुरजीत सिंह और जसबीर सिंह समेत कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी।
स्थिति बिगड़ने पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश से पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। आरोप है कि इसके बाद भीड़ राजौंद गांव की ओर चली गई और राजौंद पावर हाउस में आगजनी की। बाद में ग्रामीणों के साथ भी विवाद हुआ। आरोपों के अनुसार, भीड़ खेतों की ओर चली गई, जहां ग्रामीणों पर फायरिंग की गई। इस दौरान राम निवास के पैर में गोली लगने की बात सामने आई थी।
पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बाद मामला दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 38 गवाह अदालत में पेश किए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता, गवाह और प्रत्यक्षदर्शी आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहे। इसके चलते अदालत ने सभी 27 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।
--आईएएनएस
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