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बारां वन मंडल में 10 करोड़ के घोटाले पर क्लीन चिट का खेल : फ्रांसीसी एजेंसी ने रोका फंड, ₹1,185 करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर गहराया संकट

जांच में उजागर हुई थीं ये धांधलियां
पूर्व सीसीएफ जयपुर राजीव चतुर्वेदी की सतर्कता टीम ने गहन तकनीकी जांच के बाद गंभीर वित्तीय और भौतिक अनियमितताओं का खुलासा किया था:
मशीनों का फर्जीवाड़ा : कंटूर ट्रेंच और तलाई खुदाई में मजदूरों के बजाय मशीनों का उपयोग किया गया और खाई की निर्धारित 45 सेमी चौड़ाई के स्थान पर मनमाने तरीके से 55 से 175 सेमी तक खुदाई कर सरकारी धन का गबन किया गया।
फर्जी मस्टररोल और भुगतान : ग्राम वन सुरक्षा समिति के महज 22 सदस्यों के नाम पर 50 दिनों में 8,713 मानव दिवस दिखाकर ₹24.83 लाख का भुगतान उठा लिया गया, जो भौतिक व व्यावहारिक रूप से असंभव है।
कागजों में 'लहलहाते' पौधे : डाबर 'बी' कार्यस्थल पर रिकॉर्ड में 19,000 पौधे लगाने का भुगतान उठाया गया, जबकि मौके पर मात्र 4,930 पौधे मिले। इनमें भी केवल 794 पौधे (मात्र 3.78%) ही जीवित पाए गए।
वन मुख्यालय का हास्यास्पद बचाव और अनुत्तरित सवाल
मुख्यालय ने 7 जुलाई 2026 के आदेश में 69 कार्यस्थलों को क्लीन चिट देते हुए तर्क दिया कि "जांच मानसून के बाद हुई थी, इसलिए बारिश से जमीन की स्थिति बदल गई होगी।
मुख्यालय के इस गैर-जिम्मेदाराना बचाव पर सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं:
क्या बारिश से तकनीकी रिकॉर्ड बदल जाते हैं? बारिश से मिट्टी बह सकती है, लेकिन मशीनों से खोदी गई खाई की चौड़ाई और कागजों में दर्ज फर्जी मस्टररोल का रिकॉर्ड कैसे बदल सकता है?
अगर सब सही था, तो कार्रवाई की सिफारिश क्यों? एक तरफ विभाग ने कार्यों को सही बताकर भुगतान का रास्ता साफ किया, वहीं दूसरी तरफ उसी आदेश में डीसीएफ और एसीएफ स्तर के अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश क्यों की गई?
किसके दबाव में हुई लीपापोती? 3,500 पन्नों की सुबूतों से भरी रिपोर्ट को दरकिनार कर महज एक पन्ने में क्लीन चिट देने की जल्दबाजी किसके इशारे पर की गई?
₹1,693 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजना दांव पर
राजस्थान वन एवं जैव विविधता विकास परियोजना (मार्च 2023 से मार्च 2031) कुल ₹1,693.91 करोड़ की लागत से प्रदेश के 13 जिलों में संचालित है। इसमें से 70% राशि (₹1,185.29 करोड़) फ्रांस की एजेंसी एएफडी (AFD) वहन कर रही है।
एएफडी ने फर्जी लेबर रिकॉर्ड, मेजरमेंट बुक और बैंक खातों में हेराफेरी की शिकायत अपनी अलग जांच यूनिट को सौंप दी है। भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने के विभागीय गठजोड़ ने अब पूरे राज्य की महत्वाकांक्षी पर्यावरण परियोजनाओं को गहरे संकट में धकेल दिया है।
Baran Forest Division Scam 2026, AFD France Rajasthan Forest Funding, Rajiv Chaturvedi Vigilance Report Forest Scam, Rajasthan Biodiversity Project Corruption
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