Advertisement
100 साल पुरानी इमारत में चल रहा सरकारी विद्यालय, कई स्थानों पर आई दरार, छत से टपकता है पानी

विद्यालय के प्रधानाचार्य मिथिलेश कुमार शर्मा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण के लिए कई बार प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल सकी। बजट के अभाव में दो क्षतिग्रस्त कमरों की छत हटाकर जनसहयोग से टीनशेड लगाकर अस्थायी व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि बारिश के दौरान अत्यधिक जर्जर कमरों को बंद कर दिया जाता है, जबकि जगह की कमी के कारण कई बार एक ही कक्ष में तीन-तीन कक्षाओं की छात्राओं को बैठाना पड़ता है। टीनशेड वाले कमरों में भी बारिश के समय पानी टपकने से पढ़ाई प्रभावित होती है।
करौली सेकेंडरी के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) इंद्रेश तिवाड़ी ने बताया कि जिन विद्यालयों के भवन जर्जर हैं, उनके निर्माण और मरम्मत की प्रक्रिया जारी है। पहले भी कई भवनों का निर्माण कराया जा चुका है और शेष कार्य जल्द पूरा कराया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि जिन विद्यालयों में नामांकन कम हुआ है, वहां छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षकों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ अब अभिभावकों और विद्यार्थियों को उम्मीद है कि विद्यालयों की आधारभूत समस्याओं का शीघ्र समाधान होगा और सुरक्षित वातावरण में पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी।
--आईएएनएस
ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
Advertisement
करौली
Advertisement
राजस्थान से
सर्वाधिक पढ़ी गई
Advertisement
Traffic
Features


