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जापान में 1,800 लोगों ने रस्सियों से खींचकर 360 टन का किला फिर अपनी जगह पहुंचाया

किले को खींचने के लिए ‘हिकिया’ नाम की पारंपरिक तकनीक अपनाई गई। इसमें किसी ऐतिहासिक इमारत को तोड़ने के बजाय उसे रोलर्स और रेल की मदद से धीरे-धीरे दूसरी जगह ले जाया जाता है। हिरोसाकी कैसल के अधिकारियों के मुताबिक, यह तकनीक प्राचीन जापान में इस्तेमाल होती रही है और करीब एक सदी बाद पहली बार किसी किले को इस तरह स्थानांतरित करने में इसका इस्तेमाल किया गया।
हिरोसाकी कैसल की पत्थर की दीवार को भूकंप से नुकसान पहुंचा था। इसकी मरम्मत के लिए 2015 में करीब 360 टन वजनी मुख्य टावर को उसकी मूल जगह से हटाकर लगभग 80 मीटर दूर ले जाया गया था। दीवार की मरम्मत दिसंबर 2024 में पूरी हुई और उसके 2,185 पत्थरों को उनकी मूल स्थिति में दोबारा लगाया गया।
अब टावर को वापस लाने का काम चल रहा है। अगस्त के अंत तक करीब 4,100 लोगों की मदद से इसे हाथों से कुल पांच मीटर तक खींचने की योजना है। इसके बाद बाकी करीब 73 मीटर की दूरी मशीनों की मदद से तय की जाएगी और पूरे साल के अंत तक टावर को उसकी मूल जगह पर वापस पहुंचाने का लक्ष्य है।
हिरोसाकी कैसल का निर्माण 1611 में हुआ था। मौजूदा मुख्य टावर 1810 में बनाया गया था। यह जापान में बचे केवल 12 ऐतिहासिक किला-टावरों में शामिल है और उत्तर-पूर्वी तोहोकू क्षेत्र में ऐसा एकमात्र टावर है।
मरम्मत पूरी होने के बाद भी पर्यटकों को इसे देखने के लिए इंतजार करना होगा। संरक्षण कार्य के कारण किले के मुख्य टावर को 2033 तक पर्यटकों के लिए फिर से खोलने की उम्मीद है।
--आईएएनएस
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