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महाराजगंज : पूर्व भाजपा नेता राही मासूम राजा को उम्रकैद, नाबालिग से रेप और पिता की हत्या का मामला

तत्कालीन क्षेत्राधिकारी (सीओ) अजय सिंह चौहान ने जांच शुरू की। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पता चला कि सिपाही आबिद अली और मुमताज शाह उर्फ गुड्डू ने मामले को दबाने और मैनेज करने में अहम भूमिका निभाई थी। पीड़िता ने बताया था कि बयान बदलने के लिए उस पर दबाव बनाया गया और इसके लिए उसे 9 लाख रुपये दिए गए थे। सीओ ने पीड़िता के घर से यह रकम भी बरामद की थी। इसके बाद मजिस्ट्रेट के सामने पीड़िता का दोबारा बयान दर्ज किया गया, जिसमें सारी सच्चाई उजागर हुई। इस मामले में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने कई पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया था।
लंबी सुनवाई और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने राही मासूम राजा को दोषी ठहराया। उन्हें दुष्कर्म, हत्या, एससी-एसटी एक्ट और पॉक्सो एक्ट के तहत आजीवन सश्रम कारावास और 2 लाख 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई गई। वहीं, मामले को मैनेज करने में शामिल सिपाही आबिद अली और मुमताज शाह उर्फ गुड्डू को चार-चार साल की कारावास और तीन-तीन हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया।
शासकीय अधिवक्ता विनोद सिंह ने बताया, "यह मामला नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म और उसकी छोटी बहन के साथ छेड़छाड़ से शुरू हुआ था। जब यह घटना सामने आई तो राही मासूम राजा ने पीड़िता के पिता को जहर दे दिया, जिससे उसकी मृत्यु हो गई। कोर्ट ने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर राही को दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके अलावा, मामले को दबाने में मदद करने वाले सिपाही आबिद अली और सहयोगी मुमताज शाह को भी सजा दी गई है।"
--आईएएनएस
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