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कृषि कारोबार के नाम पर करोड़ों की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सौरभ तिवाड़ी के सुपरविजन तथा वृत्ताधिकारी ताराचंद के निर्देशन में थानाधिकारी राजेश खटाना के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। जांच के दौरान सामने आया कि एफआईआर में दर्ज नाम, पते और मोबाइल नंबर पूरी तरह फर्जी थे। इसके बाद पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान, खुफिया सूचना और लगातार निगरानी के आधार पर गिरोह के वास्तविक सदस्यों की पहचान की।
पंजाब से दबोचा गया आरोपी—
विशेष टीम ने गिरोह के सदस्य रघुनाथ पुत्र रामगणेश गुप्ता निवासी बस्ती उत्तर प्रदेश हाल निवासी लुधियाना पंजाब को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
किसानों को कृषि योजनाओं का लालच देकर करते थे ठगी—
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि गिरोह फर्जी कृषि कंपनियां बनाकर किसानों को आधुनिक खेती, पॉलीहाउस, फलदार पौधों के बगीचे तथा जैविक खाद की एजेंसी दिलाने का झांसा देता था। इसके लिए फर्जी बैंक खाते, फर्जी दस्तावेज और नकली पहचान का उपयोग किया जाता था। विश्वास जीतने के बाद किसानों से बड़ी रकम वसूल कर आरोपी फरार हो जाते थे।
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