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माल्टा फैशन वीक में दौसा की बहू ने लहराया राजस्थानी संस्कृति का परचम, यूरोप में बिखेरे पारंपरिक लहंगे-ओढ़नी के रंग

khaskhabar.com: मंगलवार, 08 जुलाई 2025 4:32 PM (IST)
माल्टा फैशन वीक में दौसा की बहू ने लहराया राजस्थानी संस्कृति का परचम, यूरोप में बिखेरे पारंपरिक लहंगे-ओढ़नी के रंग
दौसा। राजस्थान की मिट्टी से उठी एक और प्रेरक कहानी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय संस्कृति की महक बिखेर दी है। दौसा की बहू धोली मीना ने यूरोपीय देश माल्टा में आयोजित माल्टा फैशन वीक 2025 में भाग लेकर न केवल फैशन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई, बल्कि राजस्थानी परंपरा और महिला सशक्तिकरण का अद्भुत उदाहरण भी प्रस्तुत किया। धोली मीना ने जब माल्टा की राजधानी वैलेटा में आयोजित इस प्रतिष्ठित फैशन वीक में राजस्थानी पारंपरिक लहंगा-ओढ़नी पहनकर रैम्प पर कदम रखा, तो वहां उपस्थित यूरोपियन दर्शक आश्चर्य और प्रशंसा से भर उठे। उनकी पारंपरिक पोशाक, गहनों और आत्मविश्वास भरे अंदाज़ ने ना केवल आयोजकों को मंत्रमुग्ध किया बल्कि दर्शकों को भारतीय संस्कृति की समृद्धता से भी परिचित कराया। “ऐसी सुंदर ड्रेस में पहली बार देखी कोई भारतीय महिला” – आयोजकों की प्रतिक्रियाधोली मीना ने khaskhabar.com से बातचीत में बताया कि जब वे माल्टा फैशन वीक में भारतीय संस्कृति के रंगों में रंगकर पहुँचीं, तो आयोजकों ने कहा:
“हमने आज तक किसी भारतीय महिला को इतनी खूबसूरती से पारंपरिक परिधान में इस मंच पर नहीं देखा।”
गौरतलब है कि माल्टा फैशन वीक पिछले 27 वर्षों से आयोजित हो रहा है और यह यूरोप का एक प्रतिष्ठित फैशन शो है। यह शो वैलेटा शहर में होता है, जो कि यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट भी है और यूरोप का एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल माना जाता है।
"मैं गांव की हूं, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं होती" – धोली मीनाधोली मीना ने अपनी इस उपलब्धि को “गांव की महिलाओं की जीत” करार दिया। उन्होंने कहा:
“यह मेरे लिए गर्व का क्षण है कि मैं राजस्थानी संस्कृति को उस मंच पर ले जा सकी, जहां दुनिया के बड़े-बड़े फैशन डिज़ाइनर और मॉडल्स भाग लेते हैं।”
साथ ही उन्होंने यह संदेश भी दिया : “मैं हर ग्रामीण महिला से कहना चाहती हूं – खुद को कभी कम मत समझो। अपने हुनर को पहचानो, निखारो और आगे बढ़ो। मौका जरूर मिलेगा।”
राजस्थान की मिट्टी से फैशन वीक तक – धोली मीना की प्रेरणादायक यात्रा
धोली मीना का यह सफ़र ना केवल व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक आंदोलन का हिस्सा भी है, जिसमें भारतीय महिलाएं पारंपरिक परिधानों को ग्लोबल रैंप पर ले जा रही हैं। ऐसे आयोजनों में जब कोई महिला पारंपरिक पहनावे में शिरकत करती है, तो वह अपने राज्य, अपने देश और अपनी जड़ों का प्रतिनिधित्व करती है।
नारी शक्ति की नई मिसाल
धोली मीना की यह उपलब्धि केवल एक फैशन शो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस महिला की प्रेरणा है जो किसी गांव, कस्बे या छोटे शहर से हैं और अपने सपनों को पंख देने की कोशिश में हैं।
“संस्कृति हमारी पहचान है, और जब वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचती है, तो गर्व सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं होता, पूरे देश का होता है।”

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