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उत्तर प्रदेशः मासूम अरुण उर्फ डग्गू हत्याकांड में कोर्ट ने दोनों आरोपियों को किया बरी

फैसले में अदालत ने विवेचना पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्कालीन विवेचक निरीक्षक विजय नारायण प्रसाद ने जांच में आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया, जिससे जांच की निष्पक्षता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई। अदालत ने इसे घोर लापरवाही मानते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की है। अब इस फैसले के बाद पूरे मामले में पुलिस जांच की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
5 मार्च 2022 को मटिहना गांव निवासी महिला ने थाना कोतवाली खलीलाबाद को ने सूचना दी कि उसका 7 वर्षीय बेटा लापता हो गया है। इसके बाद 6 मार्च को बच्चे का शव मिला था। शव मिलने पर महिला ने पुलिस को शिकायत देकर आरोप लगाया कि गांव के रविचंद्र उर्फ मंटू और धनेश्वर उर्फ झिंगेलाल ने उसके बेटे को अगवा कर हत्या कर दी। इसके बाद दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। धनेश्वर को कुछ समय बाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी, लेकिन रविचंद्र जेल में ही बंद थे।
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