Possession without CC proved costly for the builder: Cosmos Infra fined, ordered to hand over flat to allottee along with interest-m.khaskhabar.com
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बिना CC कब्जा थमाना बिल्डर को भारी पड़ा : कॉसमॉस इंफ्रा पर जुर्माना, आवंटी को ब्याज समेत फ्लैट सौंपने का आदेश

khaskhabar.com: शुक्रवार, 05 जून 2026 6:55 PM (IST)
बिना CC कब्जा थमाना बिल्डर को भारी पड़ा : कॉसमॉस इंफ्रा पर जुर्माना, आवंटी को ब्याज समेत फ्लैट सौंपने का आदेश
खास खबर। भिवाड़ी राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) ने रीयल एस्टेट बाजार में प्रमोटरों की विधिक मनमानी और अवैध पजेशन पत्रों के खेल पर एक बड़ा और नजीर बनने वाला फैसला सुनाया है। अथॉरिटी ने स्पष्ट किया है कि सक्षम प्राधिकारी से 'पूर्णता प्रमाणपत्र' (Completion Certificate) प्राप्त किए बिना खरीदार पर कब्जा लेने का दबाव बनाना पूरी तरह गैर-कानूनी है। रेरा की सदस्य रश्मि गुप्ता ने 'अशोका-कॉसमॉस ग्रीन्स' प्रोजेक्ट के मामले में बिल्डर की तकनीकी आपत्तियों को धता बताते हुए आवंटी के हक में 10.80% वार्षिक ब्याज देने और संशोधित विधिक दस्तावेजों के साथ फ्लैट का वास्तविक कब्जा सौंपने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। यह मामला आवंटी नरेंद्र सैनी और सह-आवंटी से जुड़ा है, जिन्होंने भिवाड़ी (अलवर) स्थित इस ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के टावर-A में पहली मंजिल पर फ्लैट नंबर A-103 बुक किया था। दोनों पक्षों के बीच 18 जनवरी 2016 को 'बिल्डर बायर एग्रीमेंट' (BBA) निष्पादित हुआ था, जिसकी कुल कीमत ₹52,83,852 तय की गई थी।
आवंटियों ने बैंक लोन और स्वयं के स्रोतों से कुल कीमत का 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा यानी ₹49,17,481 का भारी-भरकम भुगतान दिसंबर 2015 से फरवरी 2017 के बीच ही प्रमोटर को कर दिया था। समझौते के तहत प्रमोटर को 18 जनवरी 2020 तक फ्लैट का वैध भौतिक कब्जा सौंपना था, जिसमें वह पूरी तरह विफल रहा।
सुनवाई के दौरान प्रमोटर 'मिसर्स कॉसमॉस इंफ्रा इंजीनियरिंग इंडिया लिमिटेड' ने कानूनी दांव खेलते हुए दलील दी कि आवंटी की यह तीसरी शिकायत है और पूर्व की दो शिकायतें तकनीकी आधार पर खारिज हो चुकी हैं, इसलिए 'रेस जूडिकाटा'- पूर्व न्याय सिद्धांत) के तहत यह केस सुनवाई योग्य नहीं है। इसके अलावा बिल्डर ने दावा किया कि उसने 4 सितंबर 2019 को ही पजेशन लेटर जारी कर दिया था। रेरा अथॉरिटी ने बिल्डर के इन तमाम तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया।
सदस्य ने विधिक व्यवस्था दी कि चूंकि पूर्व के मामले मेरिट (गुण-दोष) के आधार पर नहीं बल्कि केवल तकनीकी व प्रक्रियात्मक खामियों के कारण खारिज हुए थे, इसलिए खरीदार को न्याय से वंचित नहीं किया जा सकता।
अथॉरिटी ने प्रमोटर की पोल खोलते हुए रिकॉर्ड में पाया कि बिल्डर को प्रोजेक्ट का आधिकारिक कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) 30 जून 2021 (वेब पोर्टल पर दर्ज 5 जुलाई 2021) को मिला था। ऐसे में बिल्डर द्वारा 4 सितंबर 2019 को जारी किया गया पजेशन लेटर पूरी तरह से अपरिपक्व, अवैध और भ्रामक था। चूंकि अब प्रोजेक्ट पूर्ण हो चुका है और राशि का एक बड़ा हिस्सा प्रोजेक्ट में लग चुका है, इसलिए रेरा ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए रिफंड की मांग को तो नामंजूर कर दिया, लेकिन प्रमोटर को गंभीर वित्तीय हर्जाने के लिए पाबंद कर दिया।
अथॉरिटी ने मामले का निस्तारण करते हुए आदेश दिए हैं चूंकि प्रोजेक्ट अब पूरी तरह पूर्ण हो चुका है, इसलिए आवंटी नरेंद्र सैनी को फ्लैट नंबर A-103 का भौतिक कब्जा लेने का निर्देश दिया जाता है। प्रमोटर 'कॉसमॉस इंफ्रा' को आदेश दिया गया है कि वह आवंटी द्वारा जमा कराई गई ₹49,17,481 की पूरी राशि पर तय कब्जा तिथि (18 जनवरी 2020) से लेकर पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्त होने की तिथि (30 जून 2021) तक की अवधि का 10.80% वार्षिक दर से विलंब ब्याज चुकाए।
बिल्डर को पूर्व में सुधार के लिए लिए गए आवंटियों के मूल अनुबंध पत्रों को दुरुस्त कर वापस सौंपना होगा। इस संचित ब्याज राशि को आवंटी की किसी भी वैध बकाया अंतिम किश्त में समायोजित किया जाएगा और शेष शुद्ध राशि का लेनदेन संबंधित पक्ष को करना होगा। रेरा ने इस आदेश की पूर्ण पालना के लिए प्रमोटर को वेब पोर्टल पर अपलोड होने की तिथि से 45 दिनों का समय दिया है।

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