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संभल में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, मंदिर और 150 वर्ष पुरानी मजार को लेकर प्रशासन व स्थानीय लोग आमने-सामने

khaskhabar.com: सोमवार, 07 सितम्बर 2026 6:43 PM (IST)
संभल में जमीन विवाद ने पकड़ा तूल, मंदिर और 150 वर्ष पुरानी मजार को लेकर प्रशासन व स्थानीय लोग आमने-सामने
संभल,। उत्तरा प्रदेश में संभल जिले के शेर खां सराय गांव में आर्य समाज मंदिर की करीब पांच बीघा भूमि पर कब्जे को लेकर विवाद गहरा गया है। तहसील प्रशासन का दावा है कि लंबी जांच और एसडीएम न्यायालय में करीब एक वर्ष तक चली सुनवाई के बाद संबंधित भूमि को दोबारा आर्य समाज मंदिर और ग्रामसभा के नाम दर्ज कर दिया गया है। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि भूमि पर मौजूद मजार करीब 150 वर्ष पुरानी है और वर्षों से यहां धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं। तहसीलदार धीरेंद्र कुमार ने बताया कि लगभग एक वर्ष पहले आर्य समाज मंदिर की ओर से शिकायत दी गई थी कि मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। जांच में सामने आया कि वर्ष 1960 के दशक में चकबंदी के दौरान गाटा संख्या 103, 106 और 107 में करीब पांच बीघा और 3350 वर्ग मीटर भूमि आर्य समाज मंदिर के नाम दर्ज थी। इस भूमि के प्रबंधन की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान को पदेन रूप से सौंपी गई थी। प्रशासन के अनुसार, समय के साथ मिलीभगत के जरिए भूमि के विभिन्न हिस्सों की बिक्री कर दी गई। इसके बाद संबंधित भूमि पर करीब आठ से दस मकान बन गए और एक मजार का निर्माण भी हो गया। शिकायत के बाद मामला एसडीएम न्यायालय पहुंचा, जहां करीब एक वर्ष तक सुनवाई चली और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया।
तहसील प्रशासन का कहना है कि सुनवाई के बाद एसडीएम न्यायालय ने भूमि को पुनः आर्य समाज मंदिर और प्रबंधक ग्रामसभा के नाम दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद अब कब्जेधारकों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नोटिस के बाद भी यदि भूमि खाली नहीं की गई तो नियमानुसार बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
तहसीलदार धीरेंद्र कुमार ने बताया कि मुख्य आबादी के बीच स्थित इस भूमि की अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपए है। भूमि पर बने मकानों और मजार को लेकर अब आगे की कार्रवाई राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेश के आधार पर की जाएगी। उन्होंने ग्रामसभा से भी भूमि को अपने कब्जे में लेकर सार्वजनिक हित में उपयोग करने का अनुरोध किया है।
दूसरी ओर, स्थानीय निवासियों ने प्रशासन के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि संबंधित मजार कोई नया निर्माण नहीं है। स्थानीय निवासी सिदरा के अनुसार, मजार करीब 150 वर्ष पुरानी है और पीढ़ियों से यहां उर्स सहित अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का दावा है कि उनके बुजुर्गों से भी इस मजार के पुराने होने की जानकारी मिलती रही है। उनका कहना है कि यह स्थान लंबे समय से धार्मिक आस्था का केंद्र रहा है और आसपास के लोग नियमित रूप से यहां आते हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई की जाती है तो वे उपलब्ध पुराने दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखेंगे।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि परिसर में दो मजार मौजूद हैं, जिन्हें दो भाइयों से संबंधित बताया जाता है। उनका दावा है कि कुल पांच भाइयों के नाम पर अलग-अलग स्थानों की पहचान बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर एक क्षेत्र को अली सराय के नाम से भी जाना जाता है, जबकि सरकारी अभिलेखों में यह इलाका शेर खां सराय के नाम से दर्ज है।
एक ओर राजस्व अभिलेखों और एसडीएम न्यायालय के आदेश के आधार पर प्रशासन भूमि को आर्य समाज मंदिर और ग्रामसभा की संपत्ति बता रहा है, वहीं स्थानीय लोग मजार को ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल बताते हुए अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज पेश करने की बात कह रहे हैं। प्रशासन ने कहा है कि नियमानुसार नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
--आईएएनएस

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