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चुनाव से पहले बीपीएल कार्ड बांटे, मतदान के बाद पात्रता पर उठाए सवाल : कुमारी सैलजा

कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि केवल छह महीने के भीतर ऐसा कौन-सा आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन हुआ, जिससे 13.50 लाख परिवार अचानक बीपीएल की पात्रता से बाहर हो गए। क्या इन परिवारों की आय इतनी बढ़ गई कि उन्हें सरकारी सहायता की जरूरत नहीं रही अथवा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ के लिए बिना पर्याप्त जांच के बीपीएल कार्ड बनाए गए थे?
सांसद ने कहा कि बीपीएल कार्ड केवल एक दस्तावेज नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के राशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ा महत्वपूर्ण आधार है। पात्र परिवारों के नाम बिना पारदर्शी जांच और उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिए सूची से हटाना अनुचित होगा। सत्यापन प्रक्रिया में ग्राम सभाओं, स्थानीय निकायों और संबंधित परिवारों की सहभागिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कुमारी सैलजा ने मांग की कि सरकार बीपीएल सूची से बाहर किए गए 13.50 लाख परिवारों का जिलावार विवरण तथा उन्हें अपात्र ठहराने के आधार सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र परिवार का राशन कार्ड या सरकारी सुविधा बंद नहीं होनी चाहिए। शिकायतों के निपटारे के लिए सरल और समयबद्ध अपील व्यवस्था बनाई जाए, ताकि वास्तविक जरूरतमंद परिवार सरकारी योजनाओं से वंचित न रहें।
कुमारी सैलजा ने भाजपा नेताओं की कथित विभाजनकारी भाषा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर इस प्रकार की भाषा के माध्यम से वे क्या संदेश देना चाहते हैं? क्या भाजपा एक बार फिर धर्म और जाति के आधार पर समाज को बांटकर सांप्रदायिक राजनीति करना चाहती है? उन्होंने कहा कि यही भाजपा और आरएसएस की राजनीति का वास्तविक स्वरूप रहा है, लेकिन जनता अब इस घिसे-पिटे पैंतरे को अच्छी तरह पहचान चुकी है।
सांसद ने कहा कि प्रदेश के वास्तविक मुद्दे भ्रष्टाचार, युवाओं का पलायन, बेरोजगारी, बढ़ते अपराध और भविष्य को लेकर पैदा हुई असुरक्षा हैं। सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए। अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक और जातीय भावनाएं भड़काने का पुराना रिकॉर्ड अब बार-बार नहीं चलेगा।
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