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पंजाब सरकार पर अकाली दल का निशाना, सीएम परिवार पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच की मांग

khaskhabar.com: रविवार, 23 अगस्त 2026 10:40 PM (IST)
पंजाब सरकार पर अकाली दल का निशाना, सीएम परिवार पर लगे आरोपों की सीबीआई जांच की मांग
खास खबर। श्री आनंदपुर साहिब शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने पंजाब सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए कई मुद्दों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार लगातार कर्ज लेकर पंजाब को आर्थिक संकट की ओर धकेल रही है और हाल ही में कनाडा से 15,000 करोड़ रुपए का कर्ज लेने की प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हुई हैं।
डॉ. चीमा ने कहा कि पंजाब पर पहले से ही करीब 4.5 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है, लेकिन इसके बावजूद सरकार नए कर्ज लेने की तैयारी कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस कर्ज प्रक्रिया में शामिल दो एजेंसियों या बिचौलियों को करीब 340 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाना है, जिनमें से एक एजेंसी को केवल बैंक और पंजाब सरकार के बीच बैठक कराने के लिए 190 करोड़ रुपए फीस के रूप में दिए जाने हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार के पास मुख्य सचिव से लेकर बड़ी संख्या में आईएएस अधिकारी मौजूद हैं तो फिर परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और कर्ज संबंधी दस्तावेज बनाने के लिए बिचौलियों पर इतना पैसा खर्च करने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने कहा कि यह पैसा जनता का है और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि 340 करोड़ रुपए किस आधार पर दिए जा रहे हैं तथा इस पूरी प्रक्रिया में किस-किस का लाभ जुड़ा हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कहीं से भी पैसा जुटाने की यह नीति पंजाब को बर्बाद कर रही है और इसमें भ्रष्टाचार की आशंका दिखाई देती है।
कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी डॉ. चीमा ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि राज्य में चोरी, हत्या और विस्फोट जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन पुलिस का ध्यान मूल जिम्मेदारियों के बजाय अन्य कार्यों में लगाया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे विभाग मौजूद हैं तो हर काम पुलिस से क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने रोपड़ में लंबे समय तक सफाई व्यवस्था बिगड़ने का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार प्रशासनिक मोर्चे पर विफल साबित हो रही है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अकाली दल नेता ने कहा कि पार्टी 1984 के सिख विरोधी दंगों के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा कांग्रेस के नेता दीपेंद्र हुड्डा सज्जन कुमार की प्रशंसा कर रहे हैं, जबकि पंजाब में कांग्रेस नेता उनके खिलाफ बयान देकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष राजा वड़िंग से सवाल किया कि यदि वे सज्जन कुमार की भूमिका के विरोध में थे तो उन्होंने पहले आवाज क्यों नहीं उठाई।
डॉ. चीमा ने कांग्रेस नेतृत्व से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख बताने की मांग की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी को सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को जगदीश टाइटलर और कमलनाथ जैसे नेताओं के संबंध में भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए, जिनके नाम विभिन्न रिपोर्टों में सामने आते रहे हैं।
एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए डॉ. चीमा ने दावा किया कि दुष्कर्म से जुड़े एक मामले में मुख्यमंत्री के परिवार पर पांच करोड़ रुपए लेने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह आरोप एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की ओर से लगाए गए हैं और इस मामले से संबंधित याचिका उच्च न्यायालय में लंबित है। साथ ही राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का नोटिस भी सरकार को मिल चुका है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के ओएसडी पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं और इस संबंध में डीजीपी को पत्र भेजा जा चुका है। उनका कहना था कि यदि मुख्यमंत्री को विश्वास है कि कोई गलत काम नहीं हुआ है तो मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए। अगर सरकार को सीबीआई पर भरोसा नहीं है तो किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए।
डॉ. चीमा ने कहा कि यदि सरकार खुद अपने मंत्रियों, अधिकारियों और करीबी लोगों को क्लीन चिट देगी तो जनता ऐसे निष्कर्षों पर भरोसा नहीं करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से सभी आरोपों पर खुलकर सामने आने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की, ताकि लोगों का भरोसा कायम रह सके।

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