Major Claim on Social Media: Allegations of Encroaching on Pasture Land Under the Guise of a Cow Shelter-m.khaskhabar.com
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सोशल मीडिया पर बड़ा दावा : गौशाला के नाम पर चारागाह भूमि कब्जाने का खेल, शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा पर गंभीर आरोप

khaskhabar.com: बुधवार, 08 जुलाई 2026 2:55 PM (IST)
सोशल मीडिया पर बड़ा दावा : गौशाला के नाम पर चारागाह भूमि कब्जाने का खेल, शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा पर गंभीर आरोप
शाहपुरा (भीलवाड़ा)। राजस्थान में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर दावा तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल पोस्ट्स में भीलवाड़ा के शाहपुरा से भाजपा विधायक लालाराम बैरवा और उनके परिवार पर 'गौशाला' की आड़ में करोड़ों रुपये की सरकारी चारागाह भूमि कब्जाने के बेहद गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर आकाश तिवारी के हैंडल से आरोप लगाए गए हैं। सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के अनुसार, इस पूरे मामले में नियमों को ताक पर रखकर बिजली कनेक्शन लेने और विरोध करने वाले अधिकारियों को हटाने तक के दावे किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय राजनीति में गरमाहट आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल दावे के मुख्य बिंदु : 1. एक ही परिवार के पास संस्था की कमान : सोशल मीडिया पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 21 अगस्त 2025 को 'देव गौशाला सेवा संस्था शाहपुरा' का बकायदा रजिस्ट्रेशन करवाया गया। आरोप है कि इस संस्था के पदों को पूरी तरह पारिवारिक बना दिया गया:
सचिव : स्वयं शाहपुरा विधायक लालाराम बैरवा बने।
अध्यक्ष : विधायक के पुत्र चिनार देवतवाल को बनाया गया।
कोषाध्यक्ष : जिम्मेदारी विधायक के दूसरे पुत्र जतिन देवतवाल को सौंपी गई।
सह-सचिव : विधायक के भतीजे कुंदन देवतवाल को मनोनीत किया गया।

2. कीमती चारागाह भूमि को किया गया चिन्हित :
वायरल हो रही पोस्ट्स के मुताबिक, शाहपुरा से महज 2 किलोमीटर दूर स्थित माता जी का खेड़ा पंचायत की एक सरकारी चारागाह भूमि को इस काम के लिए चिन्हित किया गया। यह जमीन इसलिए बेहद कीमती है क्योंकि यहां से भविष्य में केकड़ी-जयपुर-भीलवाड़ा-मांडल एक्सप्रेसवे प्रस्तावित है। आरोप है कि इस चारागाह भूमि का पट्टा गौशाला के नाम जारी करवाने के लिए एसडीएम (SDM) और कलेक्टर स्तर तक पैरवी की गई।
3. नियमों का पेच और तत्कालीन XEN को APO करने का आरोप :
सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि नियमानुसार किसी भी गौशाला को सरकारी जमीन का पट्टा आवंटित करने के लिए संस्था का कम से कम 3 साल पुराना होना अनिवार्य है। चूंकि यह संस्था 2025 में ही बनी थी, इसलिए नियमों के तहत कलेक्टर ने पट्टा जारी करने से साफ मना कर दिया।
XEN को हटाने का दावा : पोस्ट में आरोप है कि पट्टा न मिलने पर गौशाला का प्लान रोककर जमीन पर सीधे फेंसिंग (बाड़बंदी) शुरू कर दी गई। जब तत्कालीन विद्युत विभाग के एक्सएन (XEN) से इस विवादित भूमि पर बिजली कनेक्शन देने को कहा गया, तो उन्होंने नियमों का हवाला देकर मना कर दिया। आरोप है कि नियमों के विरुद्ध काम न करने पर तत्कालीन XEN को एपीओ (APO - पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा में) कर दिया गया और उनकी जगह आए नए XEN ने तुरंत वहां बिजली कनेक्शन जारी कर दिया।
अपनों में ही सुलग रहा विरोध, भाजपा कार्यकर्ताओं में भी सुगबुगाहट
सोशल मीडिया पर चल रहे दावों की मानें तो विधायक के इस कृत्य से न केवल शाहपुरा की आम जनता चिल्ला रही है, बल्कि शाहपुरा-भीलवाड़ा के स्थानीय भाजपा पदाधिकारी और जमीनी कार्यकर्ता भी भीतर ही भीतर बेहद नाराज हैं। वे पार्टी फोरम में दबे मुंह इस मुद्दे को उठा भी रहे हैं। आरोप है कि तमाम विरोधों के बावजूद विवादित जमीन पर बोरिंग करवा ली गई है, बिजली कनेक्शन हो चुका है, छत डल चुकी है और बाकी निर्माण कार्य भी जोरों-शोरों से जारी है।
सरकार को बदनाम करने की साजिश : वायरल पोस्ट में यह भी चिंता जताई जा रही है कि कुछ लोग इस तरह के कृत्यों से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में चल रही राज्य सरकार की साफ-सुथरी छवि को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि धरातल पर सरकार बेहतरीन काम कर रही है और कार्यकर्ताओं को पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री के कुशल नेतृत्व में पार्टी 2028 के आगामी विधानसभा चुनावों में फिर से सरकार रिपीट करेगी।
यह पूरी खबर सोशल मीडिया पर चल रहे दावों और वायरल पोस्ट्स के आधार पर बनाई गई है। इस संबंध में विधायक पक्ष या जिला प्रशासन की ओर से किसी भी आधिकारिक बयान या पुष्टि का इंतजार है।

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