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सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने से लंबित मामलों का निपटारा होगा: वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष अग्रवाल

बता दें कि यह अध्यादेश केंद्र सरकार के उस फैसले के कुछ ही दिनों बाद आया, जिसमें केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सुप्रीम कोर्ट में चार नए जजों के पद बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे पहले 5 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में 'सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026' को संसद में पेश करने का फैसला लिया गया था। सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लगातार बढ़ते कामकाज और लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए यह कदम जरूरी हो गया था। नए जजों की नियुक्ति से अदालत की कार्यक्षमता बढ़ेगी और सुनवाई में हो रही देरी को कम करने में मदद मिलेगी।
भारत में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा पहला कानून वर्ष 1956 में बनाया गया था। इसके बाद समय-समय पर न्यायपालिका की बढ़ती जरूरतों के अनुसार जजों की संख्या में बदलाव किया जाता रहा है। इससे पहले वर्ष 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी। अब नए अध्यादेश के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल स्वीकृत जजों की संख्या, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सहित, 38 हो जाएगी। इसे देश की न्यायिक व्यवस्था को और मजबूत करने तथा लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
--आईएएनएस
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