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संभल शाही जामा मस्जिद सर्वे मामले में सुनवाई टली, तीन सप्ताह बाद अगली तारीख

पहले की सुनवाई के दौरान, हिंदू पक्ष की ओर से वकील विष्णु शंकर जैन ने हाईकोर्ट को बताया था कि शाही मस्जिद पहले से ही एक संरक्षित स्मारक है। ऐसे में यहां प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट लागू ही नहीं होता। उन्होंने यह भी दावा किया था कि विवादित स्थल पर मंदिर से जुड़े प्राचीन साक्ष्यों को मिटाया जा रहा है, इसलिए वहां सर्वे कराया जाना जरूरी है।
वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि कोर्ट कमिश्नर द्वारा कराया जाने वाला सर्वे कानून के दायरे में है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है, तो उस पर पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का प्रावधान स्वतः लागू नहीं होता।
इसी आदेश को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत का रुख किया है। अब हर किसी की नजरें सुप्रीम कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि शाही जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर आगे क्या कानूनी दिशा तय होती है।
--आईएएनएस
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