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माना जाता है कि मंदिर लगभग 300 से 350 वर्ष पुराना है और पीढ़ियों से पूर्वज यहां पूजा करते आ रहे हैं, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है। एक पौराणिक कहानी के अनुसार, घने जंगल के बीच माता की मूर्ति प्रकट हुई थी। यहां पर मां दुर्गा की सात बहनों के भी थान हैं। मान्यता है कि यहां पर पूजा-अर्चना करने से मनोकामना पूर्ति व रोगों से निदान मिल जाता है।
इस मंदिर में दिव्य ज्योति जलती रहती है। यह दिव्य ज्योति हर साल चैत्र और शारदीय नवरात्र के वक्त हिमाचल प्रदेश में विराजमान मां ज्वाला देवी के मंदिर से यहां लाई जाती है। यह मंदिर सनातन परंपराओं को संजोए हुए है और स्थानीय समुदाय के लिए अत्यंत पूजनीय है।
--आईएएनएस
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