Before 2017, the previous government wouldnt even take cognizance of floods; Sapai goons would embezzle all the funds: CM Yogi-m.khaskhabar.com
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2017 से पहले की सरकार बाढ़ का संज्ञान तक नहीं लेती थी, सारा पैसा सपाई गुंडे खाकर हजम कर जाते थे: सीएम योगी

khaskhabar.com: रविवार, 06 सितम्बर 2026 7:29 PM (IST)
2017 से पहले की सरकार बाढ़ का संज्ञान तक नहीं लेती थी, सारा पैसा सपाई गुंडे खाकर हजम कर जाते थे: सीएम योगी
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित चित्रकूट के 800 परिवारों को रविवार को राहत सामग्री वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहले की सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले बाढ़ आने पर तत्कालीन सरकार इसका संज्ञान तक नहीं लेती थी। राहत के नाम पर बहुत अधिक हो-हल्ला होने पर प्रभावितों को केवल सूखे ब्रेड दे दिए जाते थे, जबकि राहत के लिए आने वाला पूरा पैसा सपाई गुंडे खाकर हजम कर जाते थे और गरीब, कमजोर एवं वंचित लोगों को कुछ नहीं मिलता था। उन्होंने कहा कि पहले जहां बाढ़ प्रभावितों को एक किलो राहत सामग्री भी नहीं मिलती थी, वहीं अब करीब 50 किलो राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद 800 बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री वितरित की गई। बाढ़ में आश्रयहीन हुए परिवारों को आवास के लिए भूमि आवंटन प्रमाण पत्र तथा आपदा मोचक निधि से राहत राशि भी वितरित की गई। इस दौरान सीएम योगी ने प्रभावित लोगों से उनका हाल-चाल जाना और बच्चों को चॉकलेट देकर उनसे बातचीत की। उन्होंने कहा कि प्रभु राम को जब वनवास हुआ था तो चित्रकूट ने उन्हें आश्रय दिया। अब चित्रकूटवासी संकट में हैं तो प्रभु का भक्त होने के नाते वे साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्थिति में गरीब और प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। बाढ़ से प्रभावित गरीबों, किसानों, नौजवानों, महिलाओं, व्यापारियों और साधु-संतों को आश्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिसका भी नुकसान हुआ है, सरकार उसे हर संभव मदद उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने चित्रकूट की पावनधारा को नमन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने लगभग 12वर्षों तक जिसधारा पर रहकर ऋषि-मुनियों के सानिध्य में राम राज्य की परिकल्पना को साकार किया था, वह भूमि आज भी आस्था और साधना का प्रमुख केंद्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में प्रभावित परिवार खुद को अकेला न समझें। डबल इंजन की सरकार भारतीय जनता पार्टी के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं के साथ उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मंदाकिनी नदी में पिछले दिनों आई भीषण आपदा से हुई त्रासदी का पहले हवाई सर्वेक्षण किया और बाद में रामघाट सहित आसपास के प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कर हालात का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि जिस दिन चित्रकूट में अचानक बाढ़ आई, उस समय वह बलिया के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर थे। सूचना मिलते ही उन्होंने लखनऊ से डीजी पीएसी को निर्देश देकर एसडीआरएफ और पीएसी की अतिरिक्त फ्लड कंट्रोल कंपनियों को तत्काल चित्रकूट रवाना कराया। उस समय जिले में एसडीआरएफ की केवल एक कंपनी तैनात थी, लेकिन अगले दो से तीन घंटे के भीतर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और पीएसी की फ्लड यूनिट की कुल आठ कंपनियां राहत एवं बचाव कार्य में जुट गईं और युद्ध स्तर पर अभियान चलाया गया। उसी दिन शाम को जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर राहत कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि घरों में फंसे सभी लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि पहली बार मंदाकिनी नदी में इतने बड़े पैमाने पर जलस्तर बढ़ा है। गत वर्ष क्षेत्र में लगभग 360 मिलीमीटर वर्षा हुई थी, जबकि इस बार इसका स्तर लगभग दोगुना पहुंच गया। मध्य प्रदेश की ओर जाने वाला भारी वाहनों का पक्का पुल भी बह गया है। उन्होंने कहा कि जब एक मजबूत पुल तक बह सकता है तो सामान्य घरों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। आपदा की इसी विकरालता को देखते हुए प्रशासन के साथ विस्तृत बैठक कर कार्ययोजना तय करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी के कैचमेंट क्षेत्र में अनियोजित निर्माण ऐसी आपदाओं का बड़ा कारण बन सकता है। उन्होंने कहा कि नदी जब अपने स्वाभाविक स्वरूप में बहती है तो उसके दायरे में आने वाले अतिक्रमण और निर्माण बह जाते हैं। इसलिए कैचमेंट क्षेत्र में ऐसे निर्माण से बचना होगा और नदी के स्वाभाविक प्रवाह के लिए पर्याप्त मार्ग सुनिश्चित करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी भीषण बाढ़ के बावजूद प्रभु श्रीराम, कामदनाथ, हनुमान और चित्रकूट के ऋषि-मुनियों की तपस्थली की कृपा से कोई जनहानि नहीं हुई।
मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावितों को आश्वस्त करते हुए कहा कि आपदा की इस घड़ी में वे अकेले नहीं हैं। सामान्य परिवारों, व्यापारियों, मठ-मंदिरों और घाटों को बाढ़ से जो भी नुकसान हुआ है, उसमें सरकार की ओर से सहयोग की व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पहले ही निर्देश दे रखा है कि बाढ़ या अग्निकांड में किसी गरीब अथवा किसी अन्य व्यक्ति का पूरा घर नष्ट हो जाता है तो पात्रता के अनुसार उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास उपलब्ध कराया जाए। यदि वह प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र नहीं है तो मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत नया आवास और जमीन का पट्टा तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की भी समुचित व्यवस्था की गई है। जहां जलजमाव हो गया है या अत्यधिक पानी आने के कारण लोग घिर गए हैं, उन्हें सुरक्षित राहत शिविरों में पहुंचाया जाए। राहत शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, सुरक्षा, चिकित्सा सहित हर प्रकार की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएम योगी ने वर्ष 2017 में बाढ़ राहत कार्यों के निरीक्षण का प्रसंग साझा करते हुए कहा कि उस समय उन्होंने अधिकारियों से पूछा था कि पीड़ित परिवारों को क्या सहायता दी जा रही है। जवाब में सूखा ब्रेड बताया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा था कि यदि आपको 10 दिन तक केवल सूखा ब्रेड दिया जाए तो क्या आप रहपाएंगे?। यदि आप नहीं रह सकते तो हमारी जनता क्योंरहेगी?। इसके बाद उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए पूरी राहत सामग्री की किट तैयार करने के निर्देश दिए। सीएम योगी ने कहा कि हर जरूरतमंद परिवार को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें 10 किलो चावल, 10 किलो आटा, 10 किलो आलू, 2 किलो अरहर की दाल, 1 लीटर रिफाइंड या सरसों का तेल, चना, लाई, मिर्च, मसाला, धनिया और हल्दी सहित अन्य आवश्यक सामग्री शामिल है।
उन्होंने कहा कि खाद्य सामग्री के साथ प्रभावित परिवारों को डिग्निटी किट भी उपलब्ध कराई जाती है। बाल्टी, मग, ढक्कनयुक्त बाल्टी और बरसाती सहित आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस तरह राहत सामग्री के माध्यम से 26 सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका वजन लगभग 50 किलो है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आपदा राहत के लिए मिलने वाली धनराशि प्रत्येक पीड़ित परिवार तक बिना किसी भेदभाव के पहुंचती है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में सांप के बिलों और अन्य स्थानों पर पानी भरने के कारण सांप, बिच्छू और जंगली जानवर बाहर निकल आते हैं। ऐसे में सभी स्वास्थ्य केंद्रों, चाहे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हों या जिला चिकित्सालय में आवश्यक दवाओं और वैक्सीन की तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। सांप के काटने पर एंटी-स्नेक वेनम और कुत्ते या किसी जंगली जानवर के काटने पर एंटी-रेबीज वैक्सीन तत्काल और नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाए।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश किसी व्यक्ति की डूबने या आकाशीय बिजली गिरने से मृत्यु होने, अथवा मनुष्य और वन्यजीव के बीच संघर्ष में किसी जंगली जानवर के हमले से जनहानि होने पर संबंधित परिवार को आपदा राहत के तहत 24 घंटे के भीतर चार लाख रुपए की सहायता उपलब्ध कराई जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली बार चित्रकूट आने पर उन्होंने लगभग 1,000 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उपहार दिया था। डबल इंजन की सरकार चित्रकूट को इस संकट से उबारने में पूरी मदद करेगी। उन्होंने कहा कि बाढ़ से फसल को हुए नुकसान का भी सर्वे कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ में जो सड़कें टूट गई हैं, घाटों को नुकसान पहुंचा है तथा बिजली के तार और खंभे क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें फिर से बनाने के लिए धन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों से कहा कि सरकार उनके साथ है और हर संभव सहयोग के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करेगी।
--आईएएनएस

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