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इंसानों के चेहरे पढ़ लेते हैं कुत्ते! डर, गुस्से और उदासी में भी कर सकते हैं फर्क, आखिर कैसे, यहां पढ़ें

इसके बाद 12 कुत्तों पर दूसरा प्रयोग किया गया। इस बार उन्हें खुश, उदास, डरे हुए और गुस्से वाले इंसानी चेहरों की तस्वीरें दिखाई गईं। शोधकर्ताओं ने मशीन लर्निंग की मदद से कुत्तों के मस्तिष्क में होने वाली गतिविधियों का विश्लेषण किया।
नतीजा खासा दिलचस्प रहा। कुत्तों के दिमाग ने खुश चेहरे को नकारात्मक भाव वाले चेहरों से अलग पहचाना। लेकिन जब केवल कुछ खास मस्तिष्क क्षेत्रों की गतिविधि देखी गई तो वे उदासी और गुस्से जैसे अलग-अलग नकारात्मक भावों में साफ फर्क नहीं कर पाए।
हालांकि, पूरे मस्तिष्क की गतिविधि का विश्लेषण करने पर तस्वीर बदल गई। शोधकर्ताओं को संकेत मिले कि कुत्ते डर और उदासी तथा डर और गुस्से के बीच अंतर कर सकते हैं। लेकिन वे गुस्से और उदासी को एक-दूसरे से अलग पहचानने में उतने सफल नहीं रहे।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इसकी एक वजह यह हो सकती है कि कुत्तों के लिए अलग-अलग नकारात्मक भाव अलग तरह के खतरे का संकेत देते हैं। वहीं, गुस्से और उदासी को समझने के लिए केवल चेहरा पर्याप्त नहीं हो सकता। शरीर की मुद्रा और दूसरी सामाजिक संकेत भी कुत्तों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ विएना की शोधकर्ता डॉ. लौरा कुआया के मुताबिक, यह पहला ऐसा अध्ययन है जिसमें संकेत मिले हैं कि कुत्तों का दिमाग एक ही भावात्मक श्रेणी के भीतर अलग-अलग मानवीय भावनाओं में अंतर कर सकता है।
शोधकर्ताओं ने हालांकि यह भी माना कि अध्ययन की कुछ सीमाएं हैं। नमूना छोटा था और इसमें शामिल ज्यादातर कुत्ते बॉर्डर कॉली थे। सभी कुत्ते स्वस्थ थे और उनमें व्यवहार संबंधी कोई समस्या नहीं थी। इसलिए इन निष्कर्षों को सभी नस्लों के कुत्तों पर समान रूप से लागू करने से पहले बड़े अध्ययन की जरूरत होगी।
--आईएएनएस
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