At Least Four Children Necessary to Preserve Family Ties: Jagatguru Swami Satish Chandra Maharaj-m.khaskhabar.com
×
khaskhabar
Aug 10, 2026 4:11 pm
Location
 
   राजस्थान, हरियाणा और पंजाब सरकार से विज्ञापनों के लिए मान्यता प्राप्त
Advertisement

पारिवारिक रिश्तों को बचाने के लिए कम से कम चार बच्चे जरूरी : जगतगुरु स्वामी सतीश चंद्र महाराज

khaskhabar.com: मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 4:46 PM (IST)
पारिवारिक रिश्तों को बचाने के लिए कम से कम चार बच्चे जरूरी : जगतगुरु स्वामी सतीश चंद्र महाराज
संभल । जगतगुरु स्वामी सतीश चंद्र महाराज ने मंगलवार को आईएएनएस के साथ बातचीत में जनसंख्या, पारिवारिक रिश्तों और महिला सशक्तिकरण जैसे विषयों पर अपनी राय रखी। उन्होंने आईएएनएस के जरिए सभी से अपील की कि वे सकारात्मक राजनीति को अपनाते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दें। उन्होंने यह संबोधन समाज को अपनी जड़ों की ओर लौटने और राष्ट्रहित में पारिवारित इकाई को मजबूत करने का संदेश दिया।
सतीश चंद्र महाराज ने घटती जनसंख्या और छोटे परिवारों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि भविष्य में परिवारों में बच्चों की संख्या कम रही, तो पारंपरिक सामाजिक रिश्ते पूरी तरह समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा, "यदि आपके कम से कम चार बच्चे नहीं होंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बाकी रिश्ते, जैसे चाचा-ताऊ और बुआ-मौसी, का वजूद ही खत्म हो जाएगा। बड़ा परिवार न केवल सामाजिक सुरक्षा का आधार है, बल्कि यह रिश्तों की जीवंतता के लिए भी अनिवार्य है।"
उन्होंने बातचीत में भविष्य को धर्म और देश सेवा से जोड़ते हुए कहा कि यदि किसी का बेटा सेना में जाकर राष्ट्र की रक्षा करता है, तो वह भी तो धर्म ही हुआ। उन्होंने कहा, "अगर हर कोई छोटे परिवार तक सीमित रहेगा, तो भविष्य में समाज को सैन्य अधिकारी, शिक्षक और पुरोहित कहां से मिलेंगे? आप चाहते हो कि आपके यहां शादी में कोई संत, मिलिट्री, शिक्षक या पुरोहित आए। तो मुझे लगता है कि हर हिंदू परिवार को इस विषय पर गंभीरता से सोचना चाहिए क्योंकि बहु-संतान परंपरा सामाजिक और धार्मिक संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।"
उन्होंने इस विषय पर होने वाली आलोचनाओं पर जवाब देते हुए कहा कि विरोध करने वालें के पास कोई ठोर आधार नहीं है। उन्होंने कहा, "शिक्षित और अच्छे मानस वाले व्यक्ति हमेशा सकारात्मक विचारों का स्वागत करते हैं, जो लोग बिना समझे विरोध करते हैं, वे वास्तव में विषय की गहराई को नहीं जानते।"
उन्होंने आगे बातचीत में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के बिना विश्व की प्रगति संभव नहीं है। हमारी माताओं और बेटियों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने ही चाहिए।
सतीश चंद्र महाराज ने उन लोगों की आलोचना की जिन्होंने इस अधिनियम का स्वागत नहीं किया। उन्होंने कहा, "हम तो उन लोगों में से हैं, जो धरती और भरत को भी 'मां' कहकर पुकारते हैं। हमारे जीवन में मातृत्व का स्थान सर्वोपरि है। फिर, चाहे वह मां, बहन, बेटी या फिर अर्धांगिनी के रूप में हो। महिला संगठन निश्चित रूप से समाज में बड़ा बदलाव ला सकते हैं क्योंकि बच्चे वही संस्कार ग्रहण करते हैं जो उनकी माताएं उन्हें देती हैं।"
--आईएएनएस

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

Advertisement
Khaskhabar.com Facebook Page:
Advertisement
Advertisement