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नासा ने दिखाई गैलेक्सी एम-77 की तीन आश्चर्यजनक तस्वीरें, दिखी 'डिफ्रैक्शन स्पाइक्स' की झलक

पहली तस्वीर-मिड-इन्फ्रारेड व्यू है। इस तस्वीर में गैलेक्सी के केंद्र से निकलने वाली तेज चमक सबसे ज्यादा आकर्षित करती है। केंद्र से छह बड़ी और दो छोटी चमकदार नारंगी किरणें बाहर की ओर निकल रही हैं। ये किरणें असल में ‘डिफ्रैक्शन स्पाइक्स’ हैं, जो वेब टेलीस्कोप की बनावट के कारण पैदा होते हैं। गैलेक्सी की सर्पिल भुजाओं में नारंगी रंग के चमकते बुलबुले दिख रहे हैं, जो नए बने तारों के समूह या स्टार क्लस्टर्स हैं। गैलेक्सी का बाकी हिस्सा धूल के नीले घूमते बादलों से भरा दिख रहा है।
वहीं, दूसरी तस्वीर नियर-इन्फ्रारेड व्यू है, जिसमें गैलेक्सी के केंद्र में 6 हजार प्रकाश वर्ष लंबा एक ‘बार’ (बार संरचना) साफ दिख रहा है। यह बार एक चमकदार छल्ले से घिरा हुआ है, जिसे ‘स्टारबर्स्ट रिंग’ कहा जाता है। यह छल्ला गैलेक्सी की दो सर्पिल भुजाओं के अंदरूनी सिरों से बनता है। स्टारबर्स्ट क्षेत्र वे जगहें हैं जहां नए तारे बहुत तेजी से बन रहे हैं। यहां भी केंद्र से छह लंबी चमकदार किरणें यानी डिफ्रैक्शन स्पाइक्स निकल रही हैं।
तीसरी तस्वीर दोनों इन्फ्रारेड व्यूज का कॉम्बिनेशन हैं। यह तस्वीर मिड-इन्फ्रारेड और नियर-इन्फ्रारेड दोनों को मिलाकर बनाई गई है। इसमें गैलेक्सी की पूरी खूबसूरती और वैज्ञानिक महत्व एक साथ दिख रहा है। केंद्र से निकलने वाले डिफ्रैक्शन स्पाइक्स, स्टारबर्स्ट रिंग, सर्पिल भुजाएं और धूल के बादल सभी स्पष्ट नजर आ रहे हैं। वेब टेलीस्कोप की बनावट की वजह से चमकदार वस्तुओं के चारों ओर छह-प्लस-दो बिंदुओं वाला पैटर्न बनता है जबकि हबल टेलीस्कोप में चार बिंदुओं वाला पैटर्न दिखता है।
--आईएएनएस
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