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अमेठी के जामों ब्लॉक में खाली कुर्सियों को मिला प्रशिक्षण: अफसर बोले – कम से कम विरोध तो नहीं किया

"हमारी ट्रेनिंग तो हो गई, और कुर्सियों ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई। बात खत्म!"दूसरे ने जोड़ा,"सिस्टम के लिए ये जरूरी था, उपस्थिति अनिवार्य नहीं थी। लेकिन फोटो और वीडियो तो चाहिए थे न!"
कार्यशाला का उद्देश्य गंभीर था, लेकिन नजारा मज़ाक बन गयाराष्ट्रीय ग्राम स्वराज योजना के तहत यह कार्यशाला पंचायत प्रतिनिधियों को यह सिखाने के लिए थी कि वे पंचायत एडवांसमेंट इंडेक्स (PAI) कैसे सुधारें। इसमें पंचायतों के डिजिटल कार्य, फंड उपयोग, पारदर्शिता, नागरिक भागीदारी जैसे बिंदुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाना था।
लेकिन जिस “जनप्रतिनिधित्व” के लिए यह कार्यशाला थी, वह नदारद था। न कोई प्रधान, न कोई बीडीसी, और न ही पंचायत सचिव। वीडियो में दिख रहा है कि सामने लगी कतारबद्ध कुर्सियों पर एक भी व्यक्ति नहीं बैठा — सिर्फ प्रशिक्षक और कैमरा।
वीडियो हुआ वायरल, सोशल मीडिया पर तंज और सवालों की बौछारकार्यशाला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। लोगों ने हास्य, व्यंग्य और आक्रोश से भरपूर प्रतिक्रियाएं दी हैं:
"शानदार प्रशिक्षण! कुर्सियों का मनोबल बढ़ा होगा"
"अब कुर्सियाँ ही अगली पंचायत चुनाव में खड़ी होंगी"
"ऐसा प्रशिक्षण, जहां भाग लेने वाला कोई नहीं और खर्चा पूरा!"
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