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नेपाल के प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा, संयुक्त राष्ट्र ने की शान्ति की अपील

मृतकों और घायलों में ज़्यादातर युवा प्रदर्शनकारी थे जिन्हें पुलिस ने गोली मारी थी. अनेक लोग गम्भीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं.मंगलवार तक, प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए थे, सरकारी इमारतों, राजनैतिक दलों के कार्यालयों और यहाँ तक कि राजधानी काठमांडू में संसद को भी आग के हवाले कर दिया गया.कुछ राजनैतिक नेताओं के घरों पर हमले किए गए, पुलिस थानों पर क़ब्ज़ा कर लिया गया और अन्तरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को बन्द कर दिया गया.प्रधानमंत्री को उनके आधिकारिक आवास से, कथित तौर पर हेलीकॉप्टर के ज़रिए निकाला गया और कुछ ही देर बाद उनके इस्तीफ़े की घोषणा कर दी गई.संघीय और प्रान्तीय स्तर पर कई मंत्रियों व संसद सदस्यों ने भी प्रदर्शनों से निपटने के तरीक़े के विरोध में, अपने पदों से इस्तीफ़ा दे दिया है, जिससे राजनैतिक विवाद और गहरा गया है.संयम बरतने की पुकारयूएन महासचिव के प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने मंगलवार को न्यूयॉर्क में नियमित प्रैस वार्ता में कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश “स्थिति पर कड़ी नज़र रख रहे हैं.”प्रवक्ता स्तेफ़ान दुजैरिक ने कहा कि एंतोनियो गुटेरेश, “जानमाल के नुक़सान से बहुत दुखी हैं” और उन्होंने आगे स्थिति को बिगड़ने से रोकने के लिए संयम बरतने का आहवान दोहराया है.स्तेफ़ान दुजैरिक ने, नेपाल से सामने आ रही नाटकीय तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा, “अधिकारियों को अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार क़ानून का पालन करना चाहिए और विरोध प्रदर्शन शान्तिपूर्ण तरीक़े से होने चाहिए, जिनमें जान-माल का सम्मान हो.”त्वरित जाँच का आहवाननेपाल में संयुक्त राष्ट्र की टीम ने भी इन पुकारों को दोहराया है और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है. साथ ही, अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया है कि क़ानून लागू करने की कार्रवाइयाँ “समानुपातिक और अन्तरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप” रहें.संयुक्त राष्ट्र टीम ने कहा, "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना तक पहुँच और शान्तिपूर्ण ढंग से एकत्र होना, नेपाली और अन्तरराष्ट्रीय क़ानून द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार हैं."टीम ने आगे कहा, "अत्यधिक बल प्रयोग के सभी आरोपों की स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष तरीक़े से शीघ्र जाँच होनी चाहिए."अचानक ग़ुस्सा फूटानेपाल में ये विरोध प्रदर्शन, हाल के वर्षों में युवाओं के नेतृत्व में हुई लामबन्दी की श्रृंखला में नवीनतम और सबसे सघन घटनाक्रम हैं. छात्र और युवा पेशेवर, राजनैतिक वर्ग से जवाबदेही की मांग के लिए बार-बार सड़कों पर उतरते रहे हैं.सोमवार के प्रदर्शनों में हज़ारों लोगों ने भ्रष्टाचार व भाई-भतीजावाद को समाप्त करने का आहवान करते हुए, राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों में तख़्तियाँ लेकर जुलूस निकाला.लेकिन मीडिया ख़बरों के अनुसार, जब सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए क़दम बढ़ाया, तो विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया. इसमें कम से कम 19 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए.इन मौतों ने व्यापक आक्रोश को भड़का दिया और प्रवासी समुदायों ने, विदेशों में एकजुटता रैलियाँ निकालीं.मंगलवार दोपहर तक, प्रदर्शनकारियों ने संसद, सर्वोच्च न्यायालय और काठमांडू स्थित केन्द्रीय प्रशासनिक परिसर, सिंह दरबार पर धावा बोल दिया और उसके कुछ हिस्सों में आग लगा दी.ख़बरों से पता चलता है कि प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों के आवासों को भी निशाना बनाया और पुलिस द्वारा अपनी चौकियाँ छोड़कर भाग जाने के बाद, कुछ जेल क़ैदी भी भाग गए.
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