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जोधपुर नगर निगम चुनाव : सियासत की फिसलन, टिकटों की कथित ‘मंडी’ और अपनों को उपकृत करने का खेल

पूरे देश में वार्ड पंच से लेकर एम पी, एम एल ए तक के चुनाव में मुसलमानों से सख्त परहेज रखने वाली बीजेपी ने शायद दस साल बाद पहली बार बद-परहेजी की, निगम चुनाव में 8 खां जी को मौका दिया है। 100 सिम्बल में से 8 मुस्लिम भी गले में केसरिया पतका लपेट कमल के निशान को वोट दो, वोट दो करते शहर भर में फिरें। विधानसभा चुनाव में जोधपुर की 10 सीटों में कांग्रेस जैसे 1 बलि का बकरा मुस्लिम उम्मीदवार देती है उसी तरह ये 8 बलि तैयार है।
चुनाव सिम्बल बिके है? ये बेजा आरोप 3 दिन से जोधपुर की फिज़ा में तैर रहे हैं। पाली से खबर आई कि कांग्रेस के टिकट 5-5 लाख में बिके, बड़े सस्ते गये? नामांकन के आखिरी दिन तो जिला अध्यक्ष शिशुपालसिंह राजपुरोहित को लोगों ने दौड़ाया। पत्थर फेंके, अध्यक्ष जी ने अस्पताल में घुस जान बचाई। आरोप लगा कि हर माल चार आना, चार आना की तर्ज पर 5 लाख, 5 लाख हुआ। अब जनाब!जोधपुर पाली से तो बड़ा है, दो-दो सी एम दिये हैं, तो यहाँ रेट 3 गुणा बढ़कर 15-15 लाख होना स्वाभाविक है। ...लेकिन ...लेकिन यहाँ भाटे नहीं बरसे। वैसे कसर तो कोई बाकी थी नहीं। खैर!
कांग्रेस के बड़े जिम्मेदार चुनाव मैदान में कूद पड़े हैं। संगठन के लोगों में से शायद सिर्फ लियाकत अली रंगरेज का पत्ता साफ हुआ है क्योंकि ये पूर्व जिला अध्यक्ष सईद अंसारी की मुर्गी थी। अंसारी जी ने पिछले दिनों अशोक गहलोत के खिलाफ सोशल मिडिया पर जोर से बांग जो दी थी। ये तो कायदा भी है कि कुम्हार, कुम्हारी से बस नहीं पड़े तो गधेड़ी के कान मड़ोडता है। तो लियाकत को छोड़ सारा कांग्रेस संगठन वोट बटोरने चुनाव में उतरा है।
जिला अध्यक्ष खुद ओमकार वर्मा और पुराने वाले अध्यक्ष नरेश जोशी तक धंधे लग गये हैं या यूँ समझें अब शंभूसिंह पंवार तो इस दुनिया में है नहीं जो कांग्रेस दफ्तर रोज शाम ठीक 5 बजे खोल देगा चाहे कोई आवौ या नहीं आवौ। निगम चुनाव कार्यकर्ताओं को लड़वाना संगठन को मजबूती देने वाला होता तो मगर यहाँ तो लूट मची थी खुद ओहदेदार ही सिम्बल बांट ले गये। जिला अध्यक्ष ओमकार वर्मा ने भले ही किसी ब्राह्मण, माळी, मेघवाल, मुसलमान को सिम्बल से मना कर दिया हो मगर किसी कायस्थ को ना नहीं कर सके।
28 सीट तो पिछली बार के पार्षद ही ले पड़े, 21 मुसलमान ओब्लइज कर दिये फिर 5 बूढ़े उम्मीदवार बुला बुलाकर मैदान में उतारे। दरियां बिछाने वाले, जुलुस रैलियों में भीड़ लाने वाले, गले में तिरंगे पतके की गांठ लगा जिंदाबाद मुर्दाबाद से अपने कंठ सुखाने वालों को फिर अंगूठा बता दिया। नतीजा 15 से 20 वार्डों में बगावत।
कांग्रेस ने जोधपुर में शायद सिर्फ 1 सीट वार्ड 56 रातानाडा के लिये टिकट देते समय सारे नॉर्म्स, क्राइटएरियाज, तय नीति सब कुछ, सब कुछ तोड़-ताड़ डाले। इस नये सीमांकन में महिला वार्ड हुआ तो पूर्व पार्षद ललित गहलोत की माताश्री पुष्पा देवी को कांग्रेस ने टिकट दिया है। ललित गहलोत ने पिछली बार यहीं से बागी निर्दलीय चुनाव लड़ कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी लूनाराम प्रजापत को हराया था। ललित में एक बड़ा गुण है कि उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व विधायक मनीषा पंवार और पूर्व राज्यमंत्री का दर्जा पाये राजेंद्र सोलंकी का 5 साल से हर वर्ष जन्मदिन मनाया, आतिशबाजी की और घेवर काटा। अशोक गहलोत के पोते राजवीर सिंह कच्छवाह की सास कांग्रेस नेत्री शारदा चौधरी की गुड बुक में ललित गहलोत का नाम है। इसके अलावा पप्पूराम डारा, कुंती देवड़ा, मनीषा पंवार, ओमकार वर्मा, गणपत सिंह चौहान की सिंडीकेट के ये मेंबर हैं। माता जी भले कुड़ी इलाके में रहती हैं, सम्भवत: कांग्रेस की प्राथमिक सदस्य भी ना हों, 67 वर्ष की आयु में चलने फिरने में बड़ी भारी तकलीफ के बावजूद ललित गहलोत की माता जी को कांग्रेस ने टिकट दे स्वयं को गौरान्वित, उपकृत और अनुग्रहित करने का पुण्य अर्जित किया है।
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