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ग़ाज़ा: फिर जबरन विस्थापित होने का जोखिम, मगर शरण के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं

ग़ाज़ा गवर्नरेट में क़रीब दो सप्ताह पहले अकाल की पुष्टि की गई थी, जिसके बाद अब नए सिरे से विस्थापन की यह चेतावनी जारी की गई है.भूख से बेहालविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आँकड़े दर्शाते हैं कि अक्टूबर 2023 में शुरू हुए इस युद्ध में कुपोषण की वजह से अब तक 361 फ़लस्तीनियों की जान जा चुकी है, जिनमें 130 बच्चे हैं.पाँच लाख से अधिक लोग, भुखमरी, मौत, खाद्य क़िल्लत से पीड़ित हैं और भयावह स्थिति से जूझ रहे हैं.ग़ाज़ा के उत्तरी हिस्से से कहीं ओर जाने की कोशिश करने वाले फ़लस्तीनियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. किसी अन्य स्थान पर पहुँचने के लिए सुरक्षित सड़क मार्ग नहीं है, अस्थाई शिविरों में भारी भीड़ है और परिवहन की ऊँची क़ीमत है, और परिवारों के लिए इसकी व्यवस्था कर पाना सम्भव नहीं है.सहायता संगठनों ने क्षोभ जताया कि ग़ाज़ा में जीवित बचे लोग अब बुरी तरह बेहाल हो चुके हैं.अस्पतालों पर भीषण बोझस्थानीय अस्पतालों पर भारी दबाव है और कुछ स्वास्थ्य केन्द्र अपनी क्षमता से कहीं अधिक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को प्रदान कर रहे हैं.ग़ाज़ा सिटी में अल शिफ़ा और अल अहलि अस्पतालों में, हर दिन बड़ी संख्या में हमलों में हताहत होने वाले लोगों को लाया जा रहा है.मानवतावादी टीम ने कहा कि यदि व्यापक स्तर पर इसराइली कार्रवाई आगे बढ़ती है, तो ग़ाज़ा पट्टी में बाक़ी बचे 50 फ़ीसदी अस्पतालों में कामकाज ठप हो सकता है.सहायता पर पाबन्दीइस बीच, ग़ाज़ा में मानवीय सहायता की आपूर्ति पर पाबन्दी है और समर्थन का मौजूदा स्तर, ज़रूरतों के नज़रिये से अपर्याप्त है.ईंधन, जल और आपूर्ति मार्गों को खुला रखे जाने पर बल दिया गया है और यह चेतावनी भी है कि यदि अवरोध इसी तरह रहे, तो स्थानीय आबादी के लिए इसके भयावह नतीजे हो सकते हैं.“ग़ाज़ा में परिवारों के लिए: ग़ाज़ा सिटी में मानवतावादी समुदाय की तब तक मौजूदगी रहेगी, जब तक हम यहाँ रह सकते हैं, जीवनरक्षक सेवाओं को पहुँचाने और सहायता यहाँ तक लाने के लिए हम हरसम्भव प्रयास करेंगे.”मानवीय सहायता संगठनों ने अन्तरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल युद्धविराम के प्रयास किए जाने की पुकार लगाई है. साथ ही, अन्तरराष्ट्रीय मानवतावादी क़ानून का पालन करना, बन्धकों व मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की अपील की गई है.
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