घोटाले पर घोटाला करने वाली बीजेपी सरकार ने किया कुर्सी घोटाला : दीपेन्द्र हुड्डा

उन्होंने कहा कि हाल ही में श्रम विभाग में करोड़ों रुपये का वर्क स्लिप घोटाला उजागर हुआ है। तीन महीने की जांच में हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी की 3 महीने (01 नवंबर 2024 से 31 जनवरी 2025) के दौरान वेरिफिकेशन की गई वर्क स्लिपों में काफी अनियमितता पाई गई।
श्रमिकों की 90 दिनों की वर्क स्लिप का जो वेरिफिकेशन किया गया, उसमें अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच 11,96,759 श्रमिकों की वर्क स्लिप का वेरिफिकेशन किया गया। एक दिन में एक कर्मचारी द्वारा औसत 2646 वर्क स्लिप वेरिफिकेशन सामने आने पर घोटाला उजागर हुआ। खुद कैबिनेट मंत्री भी ज्यादातर वर्क स्लिप वेरिफिकेशन फर्जी होने की बात कह रहे हैं। जिससे विभाग को कई सौ करोड़ रुपये की चपत लगी है।
स्टील कुर्सी घोटाले के बारे में बताते हुए सांसद दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि असंध नगरपालिका में स्टील कुर्सी खरीद में बड़ा घोटाला हुआ है। कुर्सियों का वजन और गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। टेंडर जिस कंपनी 'लक्ष्य को-ऑपरेटिव सोसाइटी' को दिया गया था, उस नाम पर सिर्फ कागजी प्रक्रिया हुई, लेकिन असली खेल दूसरे शख्स ने किया, जो खुद सरकारी नौकरी में है। इससे स्पष्ट है कि घोटाले का पैसा सत्ता में ऊपर बैठे लोगों की जेब में गया।
उन्होंने कहा कि असंध नगर पालिका ने शहर में लगाने के लिए 214 स्टील कुर्सियों का टेंडर किया था। हर कुर्सी का वजन 50 किलो और कीमत 396 रुपए प्रति किलो तय की गई थी, जिससे एक कुर्सी की कीमत करीब 19,800 रुपए बनती है। इस हिसाब से कुल टेंडर राशि 42,37,200 रुपए थी। लेकिन मामला उजागर हुआ तो पता चला कि कुर्सियों का असली वजन 30 से 35 किलो ही था। यानी हर कुर्सी में 15 से 20 किलो स्टील कम लगाया गया। इसके अलावा, 396 रुपए प्रति किलो की दर से दिखाई गई स्टील का वास्तविक बाजार मूल्य मात्र 225 रुपए किलो था, यानी कुल 14,44,500 रुपये की कुर्सी लगाई गई। इस तरह सरकारी खजाने को 27,92,700 रुपये की चपत लगी।
दीपेन्द्र हुड्डा ने कहा कि बीजेपी राज में हजारों करोड़ रुपयों के घोटाले हुए, जिनमें शराब घोटाला, खनन घोटाला, ग्वाल पहाड़ी घोटाला, धान घोटाला, सहकारिता घोटाला, FPO घोटाला, HSSC भर्ती घोटाला, कैश फॉर जॉब घोटाला, HPSC रिश्वत घोटाला (दफ्तर में कैश पकड़ा गया), पेपर लीक घोटाला, बाजरा खरीद घोटाला, राशन घोटाला, सफाई फंड घोटाला, रोडवेज किलोमीटर स्कीम घोटाला, HTET घोटाला, छात्रवृति घोटाला, फसल बीमा घोटाला, बिजली मीटर खरीद घोटाला, मेडिकल सामान ख़रीद घोटाला, शुगर मिल घोटाला, अमृत योजना घोटाला, सड़क निर्माण घोटाला, स्टेडियम निर्माण घोटाला, Family ID घोटाला, प्रोपर्टी ID घोटाला, आयुष्मान योजना घोटाला, गुरुग्राम नगर निगम घोटाला, फरीदाबाद नगर निगम घोटाला प्रमुख है।
हिसार एयरपोर्ट पर 180 करोड़ रुपये का बिना नींव का बाउंड्रीवॉल घोटाला हुआ तो कैथल में सैंकड़ों करोड़ रुपये की कीमती जमीन को महज 12 करोड़ में नीलाम कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हरियाणा में हुए भर्ती घोटाले ने तो संभवतः देश के सारे घोटालों को पीछे छोड़ दिया। HPSC दफ्तर में अधिकारियों के पास रिश्वत के 3 करोड़ 60 लाख रुपये पकड़े गये। हर प्रतियोगी परीक्षा के पर्चे आउट हुए हैं। हरियाणा में ऐसी कोई भर्ती नहीं हुई जिसका पेपर लीक या परीक्षा रद्द न हुई हो।
घूसखोरी करने वाले अधिकारी से पूछताछ में एक रेट लिस्ट का खुलासा हुआ। डेंटल सर्जन के 35 से 40 लाख, स्टाफ नर्स के 20 लाख, ANM के 10 लाख इसी प्रकार हर छोटी बड़ी पोस्ट के कम और ज्यादा रेट थे। HPSC की वर्ष 2021 की डेंटल सर्जन भर्ती परीक्षा में BJP पार्षद, VHP नेता पर नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपये हड़पने का मामला कुछ ही दिन पहले दर्ज हुआ है।
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