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जयपुर में टैक्स आतंक का संगठित खेलः फेल कंपनी को फिर उपकृत क्यों करना चाहते हैं आयुक्त

khaskhabar.com: बुधवार, 04 फ़रवरी 2026 4:08 PM (IST)
जयपुर में टैक्स आतंक का संगठित खेलः फेल कंपनी को फिर उपकृत क्यों करना चाहते हैं आयुक्त
आयुक्त ने कहा अगर स्पैरो सॉफ्टटेक टेंडर में दुबारा आती है तो मैं कुछ नहीं कर सकता, व्यापार मंडलों की मांग- फर्म को ब्लैकलिस्ट करके. ACB जांच हो
जयपुर। जयपुर शहर में यूडी टैक्स निर्धारण और वसूली के नाम पर निजी कंपनी स्पैरो सॉफ़्टेक प्रा. लि. द्वारा किया गया कार्य अब एक संगठित टैक्स आतंक का रूप ले चुका है। गलत बिल, मनमाने नोटिस और अधूरे सर्वे से परेशान व्यापारी और आम नागरिक सड़कों पर हैं, लेकिन नगर निगम प्रशासन या तो मजबूरी का हवाला दे रहा है या फिर ऊपर से दबाव के संकेतों के बीच चुप्पी साधे हुए है। हालांकि इस बीच नगर निगम ने टेंडर की तारीख अब आगे बढ़ा दी है।
स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि जब व्यापारियों ने नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी से सीधे सवाल किया, तो आयुक्त ने दो-टूक शब्दों में कहा कि अगर स्पैरो सॉफ्टटेक टेंडर में दुबारा से आती है तो मैं कुछ नहीं कर सकता। आयुक्त का यह बयान अब नगर निगम की निष्पक्षता और प्रशासनिक कार्यशैली पर ही सवाल खड़े कर रहा है।
यह हालत तो तब है जब नगर निगम की ओर से तत्कालीन आयुक्त द्वारा भ्रष्टाचार की शिकायतों को लेकर मैसर्स स्पैरो सॉफ्टटेक प्रा. लि. को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी वजह से नगर निगम ग्रेटर की छवि आम जनता में धूमिल हो रही है। चेतावनी दी कि अगर आगे शिकायतें मिलीं तो अनुबंध रद्द कर दिया जाएगा। अब नगर निगम अपने उसी पत्र को फाइलों में दबा दिया है। तमाम शिकायतों के बावजूद कार्रवाई करने के बजाय शहरवासियों की भावनाओं के विपरीत फिर उसी कंपनी को उपकृत करने की तैयारी कर रहे हैं।
फेल कंपनी, फिर भी फेवरिटः
जयपुर नगर निगम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष गिरिराज खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि स्पैरो सॉफ़्टेक अपने पुराने ठेके में पूरी तरह विफल रही है। ठेका शर्तों के अनुसार दो वर्षों में 6 लाख संपत्तियों का सर्वे किया जाना था, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने तक 3 लाख से भी कम संपत्तियों का सर्वे हुआ। इसके बावजूद अधूरे और त्रुटिपूर्ण डेटा के आधार पर रिहायशी और छोटे व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर भारी टैक्स के नोटिस जारी कर दिए गए। खंडेलवाल ने कहा कि ठेका शर्तों में RFID टैगिंग अनिवार्य थी, ताकि पारदर्शिता रहे, लेकिन यह व्यवस्था बड़े पैमाने पर लागू ही नहीं की गई। तकनीकी विफलता के बावजूद टैक्स निर्धारण कर देना पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध और अविश्वसनीय बनाता है।
निगम ने माना-गलत बिल जारी हुए, फिर भी कार्रवाई शून्यः
व्यापार मंडलों का आरोप है कि नगर निगम कैंपों और बैठकों में यह तो मान रहा है कि स्पैरो सॉफ्टटेक द्वारा गलत बिल और गलत नोटिस जारी किए गए, लेकिन इसके बावजूद न तो नोटिस रद्द किए जा रहे हैं और न ही कंपनी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई हो रही है। व्यापारियों का कहना है कि निगम अधिकारी केवल यह कहकर जान छुड़ा रहे हैं कि वे “मजबूर” हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि पूरा सिस्टम एक फेल कंपनी को बचाने में लगा हुआ है।
नया टेंडर में विजेता पहले से तय है?
सबसे गंभीर आरोप यूडी टैक्स के नए टेंडर को लेकर हैं। पूर्व नेता प्रतिपक्ष गिरिराज खंडेलवाल के अनुसार, नया टेंडर इस तरह डिजाइन किया गया है कि तकनीकी पात्रता (TQ) और अनुभव मानदंड (PQ) ऐसे रखे गए हैं, जिससे व्यवहारिक रूप से स्पैरो सॉफ़्टेक को 100 में से 100 अंक मिलें, जबकि अन्य अनुभवी कंपनियों को 55 अंकों तक सीमित कर दिया गया है। यह RTPP एक्ट की मूल भावना—पारदर्शिता, समान अवसर और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा—का खुला उल्लंघन है।
व्यापार मंडल का बड़ा कदमः
जयपुर के विभिन्न व्यापार मंडलों ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा को लिखित प्रतिवेदन सौंपते हुए मांग की है कि स्पैरो सॉफ़्टेक को ब्लैकलिस्ट किया जाए। अधूरे सर्वे के आधार पर जारी सभी नोटिस तत्काल रद्द हों।नया टेंडर तुरंत रोका जाए। पूरे मामले की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से जांच कराई जाए। व्यापार मंडलों ने यह भी आरोप लगाया है कि स्पैरो सॉफ़्टेक पर पहले से ही दो मामलों में शिकायतें/प्रकरण दर्ज हैं। इसके बावजूद उसी कंपनी को बार-बार उपकृत किया जाना निगम अधिकारियों और निजी फर्म की मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
संघर्ष का ऐलानः
गिरिराज खंडेलवाल ने साफ कहा कि नगर निगम जयपुर जनता की सेवा के लिए है, किसी निजी कंपनी की नाकामी और मुनाफाखोरी को ढोने के लिए नहीं। यदि फेल कंपनी को फिर उपकृत करने का प्रयास किया गया, तो इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई और जनआंदोलन दोनों किए जाएंगे। क्योंकि जयपुर में यूडी टैक्स का यह मामला अब केवल टैक्स का नहीं, बल्कि प्रशासनिक ईमानदारी, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार का बड़ा सवाल बन चुका है।

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