Local bodies will have to prepare a roadmap to self-finance and deal with the challenges - Dr. Arun Chaturvedi-m.khaskhabar.com
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स्थानीय निकायों को स्ववित्त पोषित और चुनौतियों से निपटने का रोडमैप बनाना होगा- डॉ. अरुण चतुर्वेदी

khaskhabar.com: सोमवार, 10 नवम्बर 2025 6:41 PM (IST)
स्थानीय निकायों को स्ववित्त पोषित और चुनौतियों से निपटने का रोडमैप बनाना होगा- डॉ. अरुण चतुर्वेदी
भरतपुर। राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरूण चतुर्वेदी ने कहा कि स्थानीय निकायों को स्ववित्त पोषित एवं आत्मनिर्भर बनाने के साथ आमजन से जुड़ी सेवाऐं पारदर्शी व ऑन लाइन प्राप्त हो इसके लिए चुनौतियों से निपटने का रोडमैप बनाकर कार्य करना होगा। सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. चतुर्वेदी सोमवार को नगर निगम सभागार में आयोजित नगर निकायों के साथ संभाग स्तरीय संवाद कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय आर्थिक रूप से सुढृढ होगें तो शहरी विकास की परिकल्पना तेजी से साकार होगी। आमजन को मूलभूत सुविधाऐं मिलने के साथ सड़क, नाली, रोशनी, पार्क संबधी विकास व बेहत्तर साफ-सफाई मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों को समन्यवय से कार्य करते हुए स्मार्ट बनने की आवश्यकता है। आमजन की सोच बदलकर जागरूक करते हुए शहर के विकास में भागीदार बनाऐं। उन्होंने कहा कि उपलब्ध संसाधनों का अधिकाधिक उपयोग एवं पुर्नउपयोग के लिए प्लान तैयार करें साथ ही आय के नवीन स्रोतों की तलाश कर उसको लागू करें। उन्होंने तकनीकी के सहयोग से परिसंपत्तियों का सर्वें करने, शहरी विकास शुल्क, पार्किंग सुविधा, मेले आयोजन आदि को भी आयवृद्धि के स्रोत के रूप में विकसित करने की बात कही।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि कचरा प्रबन्धन कर ऊर्जा के रूप में उपयोग करने, सीवरेज वाटर का पार्कों में रीयूज करने एवं सौर ऊर्जा आधारित स्ट्रीट लाइट का प्लान तैयार करने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि आमजन से जुड़ी सेवाओं में पारदर्शिता लाने एवं ऑन लाइन करने के लिए काम करने की आवश्यकता है।
सार्वजनिक पार्कों, जनसुविधाओं को विकसित कर नागरिक संगठनों के सहयोग से संचालन एवं रखरखाव का प्लान तैयार होगा तो आर्थिक भार भी कम होगा तथा लोगों का जुड़ाव बढेगा। उन्होनें कहा कि कार्यशाला में आये सुझाव महत्वपूर्ण हैं इससे आयोग को रिर्पोट तैयार करने एवं स्थानीय निकायों के समक्ष वर्तमान चुनौतियों को समझने में मदद मिलेगी।
डीग-कुम्हेर विधायक डॉ. शैलेष सिंह ने कहा कि शहरी विकास महत्त्वपूर्ण हैं, निकायों में आय बढाने के साथ आमजन की सेवाओं को सुलभ बनाया जाए। सम्भागीय आयुक्त डॉ. टीना सोनी ने कहा कि कार्यशाला में आये सुझाव स्थानीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मददगार होंगे। उन्होंने अच्छा परफोर्मेंस के आधार पर अनुदान तय करने का सुझाव दिया।
आयोग के सदस्य सचिव नरेश ठकराल ने कहा कि स्थानीय निकाय स्वयं बजट का प्लान तैयार करें, स्वयं बनाएं तथा स्वयं खर्च करें इसके लिए वित्तीय स्थिति सुढृढ करने की आवश्यकता है। उन्होंने वित्त आयोग द्वारा संभागवार आयोजित की जा रही संवाद कार्यशालाओं के बारे में विस्तार से बताया।
आयोग के हृदेश जुनेजा ने बताया कि स्थानीय निकायों को वित्तीय प्रबन्धन में सुधार की जरूरत है। उन्होंने सुझाव एवं चाही गई सुचनाओं को आयोग की वेबसाइट पर भिजवाने के निर्देश दिये। इस अवसर पर संभाग के सभी जिला कलेक्टर, नगर निकायों के सभापति/अध्यक्ष, सचिव बीडीए सुरेश नवल, अतिरिक्त संभागीय आयुक्त नीलिमा तक्षक, अतिरिक्त कलेक्टर प्रशासन घनश्याम शर्मा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। जिला कलेक्टर धौलपुर श्रीनिधि वीटी ने स्थानीय निकायों को खर्चे पर ध्यान देने की जरूरत बताते हुए बीएसआर दरों से अलग किसी भी कार्य पर खर्च की सीलिंग तय करने, कार्य पूरा होते ही भुगतान प्रक्रिया पूरी करने का सुझाव दिए।
जिला कलेक्टर करौली नीलाभ सक्सेना ने यूडी टैक्स की लिमिट हटाने, ऑनलाइन सेवाओं के लिए प्रशिक्षण देने, रिक्त चल रहे पदों को भरने का सुझाव दिया। डीग जिला कलेक्टर उत्सव कौशल ने नए जिलों में आधारभूत सुविधाओं की कमी देखते हुए अतिरिक्त अनुदान देने, शहरी क्षेत्र में होने वाली रजिस्ट्री में एक प्रतिशत सेस जोड़कर शहरी विकास को आवंटित करने का सुझाव दिया। सवाई माधोपुर के अतिरिक्त कलेक्टर सुदर्शन सिंह तोमर ने अतिक्रमण विरोधी दस्ते को अधिकार संपन्न बनाने का सुझाव दिया।
नगर निगम भरतपुर के आयुक्त श्रवण विश्नोई ने कहा कि भरतपुर में राजस्व स्रोत सीमित है। शहरी विकास भूमि कन्वर्जन के पावर भी कम कर दिए गए हैं जबकि मरम्मत व अनुरक्षण बढ़ गया है। उन्होंने जनसंख्या के साथ चुनौतियों के अनुसार ही राजस्व हिस्सेदारी में अंशदान बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस के आधार पर स्थानीय निकायों को ग्रांट दी जाए जिससे आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि शहरों का नियोजित विकास एक चुनौती है मानव संसाधन का अभाव के साथ कौशल युक्त कार्मिक भी नहीं है।
उन्होंने वर्तमान में चल रहे रिक्त पदों को भरने के साथ ही प्रत्येक स्थानीय निकाय में सूचना सहायक का पद, शहरी टाउन प्लानर का पद सृजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में एक अरबन प्लानर का पद, ई-गवर्नेंस के लिए तकनीकी स्टाफ नियुक्त किया जाए। प्रशासनिक सुधार के लिए अनुपयोगी पदों को समाप्त कर वर्तमान जरूरत के अनुसार पदों का सृजन किया जाए। उन्होंने स्लम एरिया में पीपीपी मोड पर विकास का मॉडल तैयार करने, हरित वित्त का प्लान बनाकर स्थानीय निकायों में सोलर लगाने पर अनुदान दिए जाने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि यूडी टैक्स का दायरा बढ़ाया जाए, प्रत्येक प्रॉपर्टी को इसके दायरे में लाकर आम लोगों की सहभागिता बढ़ाई जाए। प्रत्येक नगर निकायों में जीआईएस आधार पर प्रॉपर्टी का सर्वे हो समय पर टैक्स का भुगतान नहीं करने वाले पर पेनल्टी लगाई जाए। प्रत्येक निकाय में सेवाओं को ऑनलाइन किया जाए इसके लिए स्थानीय निकायों की अलग से वेबसाइट हो। उन्होंने सभी स्थानीय निकायों में ऑडिट त्रैमासिक अनिवार्य रूप से करने, सभी बड़े प्रोजेक्ट की सोशल ऑडिट की जाकर डीपीआर बनाने से लेकर क्रियान्वयन करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के सुझाव दिए।

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