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'कुंभ देश की आध्यात्मिक एकता का प्रतीक', साध्वी ऋतंभरा ने किया महाकुंभ के खर्च का बचाव

khaskhabar.com: मंगलवार, 25 अगस्त 2026 5:17 PM (IST)
'कुंभ देश की आध्यात्मिक एकता का प्रतीक', साध्वी ऋतंभरा ने किया महाकुंभ के खर्च का बचाव
वृंदावन । साध्वी ऋतंभरा ने महाकुंभ के आयोजन पर हुए खर्च को लेकर उठाए जा रहे सवालों का बचाव करते हुए कहा कि कुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। कुंभ में देश के अलग-अलग संप्रदाय और वर्ग एक साथ आते हैं और सामाजिक भेदभाव की दीवारें कमजोर होती हैं। महाकुंभ के आयोजन पर हुए भारी खर्च को लेकर उठे सवालों पर साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि कुंभ की महत्ता को केवल आर्थिक खर्च के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महाकुंभ में पूरे भारत की आध्यात्मिक शक्ति एक स्थान पर एकत्रित होती है और विभिन्न संप्रदायों के लोग इसमें शामिल होते हैं। कुंभ के दौरान लोगों के बीच मौजूद सामाजिक और धार्मिक भेदभाव की दीवारें टूटती हैं। अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक साथ गंगा स्नान करते हैं और स्वयं को एक बड़े सांस्कृतिक समुदाय का हिस्सा महसूस करते हैं। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि ऐसे आयोजन देश को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं और समाज में एकता की भावना को मजबूत करते हैं। ऐसे बड़े आयोजनों पर अगर अरबों रुपये भी खर्च होते हैं तो भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा के संदर्भ में इसे केवल खर्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। हालांकि, साध्वी ऋतंभरा ने यह भी स्पष्ट किया कि देश में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि देश के प्रत्येक विद्यार्थी को विद्यालय मिले, बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों और बच्चों को अच्छे संस्कार दिए जाएं, यह सुनिश्चित करना सरकार और समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने उन लोगों की सोच पर सवाल उठाया जो यह कहते हैं कि महाकुंभ पर खर्च किए गए धन को दूसरी जगह खर्च किया जाना चाहिए। साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि केवल किसी एक आयोजन के खर्च पर सवाल उठाने के बजाय देश में भ्रष्टाचार और घोटालों को कम करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।.
भ्रष्टाचार पर भी निशाना साधते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि विकास और जनकल्याण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। यदि भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगे और सरकारी या सार्वजनिक धन के साथ किसी प्रकार की बेईमानी न हो, तो देश के विकास और जनकल्याण के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार को देश की खुशहाली के रास्ते में बड़ी बाधाओं में से एक बताया।
मुंबई में गणपति उत्सव के दौरान हुई घटना को लेकर पूछे गए सवाल पर साध्वी ऋतंभरा ने भारत की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग त्योहार और धार्मिक परंपराएं सदियों से चली आ रही हैं और इनका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में गणपति उत्सव, दुर्गा उत्सव, नवरात्रि, रामनवमी और दीपावली जैसे पर्व पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक परंपराएं भारत की पहचान का हिस्सा हैं और इन्हें लेकर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
साध्वी ऋतंभरा ने आगे कहा कि जिन्हें भारत की इन परंपराओं से परेशानी है, उन्हें देश में रहने को लेकर विचार करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान और बांग्लादेश का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को देश की संस्कृति और परंपराओं का सम्मान करना चाहिए।
वहीं, रक्षाबंधन से जुड़े अभियान का जिक्र करते हुए साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि इस बार बड़ी संख्या में राखियां देशभर से आई हैं। उन्होंने बताया कि करीब ढाई लाख राखियां प्राप्त हुई हैं, जबकि शुरुआत में सवा लाख राखियों का संकल्प लिया गया था। उन्होंने कहा कि ये राखियां देश की सीमाओं तक पहुंचाई जाएंगी। देश के अलग-अलग बॉर्डर पर बेटियां जाकर जवानों को राखी बांधेंगी। देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जवानों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना समाज की जिम्मेदारी है।
--आईएएनएस

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