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मुंबई के लालबागचा राजा को लगता है इन चीजों का भोग, पूरी होती है हर मन्नत

लालबागचा राजा के दरबार में श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार, सोने व चांदी की वस्तुएं भी चढाते हैं और कई अपनी मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धा के अनुसार कीमती वस्तुएं अर्पित करते हैं। इनमें सोने की चेन, अंगूठी, हार, मुकुट, मोदक, गणेश प्रतिमा और चांदी की धार्मिक वस्तुएं शामिल होते हैं। हालांकि हर साल चढ़ाई जाने वाली वस्तुओं की संख्या अलग-अलग प्रकार की होती है।
महाराष्ट्र के लालबाग (परेल) इलाके में स्थित लालबागचा राजा गणेश चतुर्थी के दौरान मुंबई का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय सार्वजनिक गणेश मंडल होता है, जिसे 'नवसाचा गणपति' (भक्तों की मन्नत पूरी करने वाला) माना जाता है। भक्त बप्पा के दरबार में संतान प्राप्ति, स्वास्थ्य, व्यापार में सफलता और परिवार की खुशहाली जैसी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं।
मन्नत पूरी होने के बाद कई भक्त सोने का मुकुट, चेन, अंगूठी या चांदी की धार्मिक वस्तु अर्पित करते हैं। कुछ लोग मोदक, नारियल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाकर भी अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान को चढ़ावे का महत्व उसकी कीमत से अधिक भक्त की भावना में होता है।
इस साल पंडाल को महाकाल (महाकालेश्वर मंदिर) की भव्य थीम पर सजाया गया है। प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु बप्पा के दर्शन के लिए कतारों में लग रहे हैं। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर और कई अन्य प्रसिद्ध हस्तियों ने पंडाल में पहुंचकर बप्पा का आशीर्वाद लिया है।
लालबागचा राजा की स्थापना 1934 में लालबाग बाजार में हुई थी। इसे मुख्य रूप से स्थानीय कोली (मछुआरा) समुदाय और व्यापारियों ने मिलकर शुरू किया था। साल 1932 में पेरू चाल का स्थानीय बाजार बंद होने के बाद दुकानदारों और मछुआरों ने भगवान गणेश से स्थायी बाजार मिलने की मन्नत मांगी थी। मन्नत पूरी होने पर 12 सितंबर 1934 को पहली बार यहां गणपति की प्रतिमा स्थापित की गई। वर्ष 1935 से कांबली परिवार (मधुसूदन कांबली और उनकी पीढ़ियां) इस प्रसिद्ध मूर्ति को लगातार आकार देते आ रहे हैं।
--आईएएनएस
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