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अब धार्मिक स्थलों की पहचान बताएगा बारकोड, इतिहास और मान्यताओं से सीधे जुड़ेंगे पर्यटक-श्रद्धालु

पर्यटन मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 575 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इन परियोजनाओं में शिलालेख और बारकोड की व्यवस्था का प्राविधान किया गया है। इनमें से 14 आस्था स्थलों पर यह कार्य पूरा हो चुका है, जबकि अन्य स्थलों पर भी बारकोडयुक्त शिलालेख लगाने की प्रक्रिया कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से आगे बढ़ाई जा रही है। जिन प्रमुख स्थलों पर शिलालेख एवं बारकोड लगाने का कार्य पूरा हो चुका है, उनमें नार्दानंद ऋषि आश्रम, मैनपुरी; सामौर बाबाधाम, फिरोजाबाद; वनखंडेश्वर मंदिर उखरैंड; च्यवन ऋषि आश्रम, मैनपुरी; राधाकृष्णन मंदिर, फिरोजाबाद; कल्याणी माता मंदिर, प्रयागराज; श्री दुर्वासा आश्रम, प्रयागराज; शूलकंटेश्वर महादेव मंदिर, प्रयागराज और श्री दशाश्वमेध मंदिर, प्रयागराज शामिल हैं।
इसके अलावा पगलानंद आश्रम, प्रयागराज; कमन्हिया बाबा मंदिर, अयोध्या; प्राचीन शिवाला मंदिर, अयोध्या; प्राचीन ज्वालादेवी मंदिर, सुचितागंज-सोहावल, अयोध्या तथा गहनाग बाबा मंदिर, अयोध्या में भी शिलालेख और बारकोड का कार्य पूरा किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर इस तरह की सूचना व्यवस्था से श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ प्रदेश में धार्मिक एवं विरासत पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
खासतौर पर ऐसे छोटे और अपेक्षाकृत कम चर्चित स्थलों को इससे नई पहचान मिल सकती है, जिनका स्थानीय इतिहास और धार्मिक महत्व तो है, लेकिन उनकी जानकारी व्यापक स्तर पर लोगों तक नहीं पहुंच पाती। इस व्यवस्था के जरिए उत्तर प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल जानकारी से जोड़ने की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा रहा है। आने वाले समय में अन्य परियोजनाओं के पूरा होने के साथ प्रदेश के और अधिक धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थल इस सुविधा से जुड़ेंगे।
--आईएएनएस
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