Advertisement
'फुल्लू' को 9 साल पूरे, शारिब हाशमी बोले-'यह पहली हिंदी फिल्म, जिसने पीरियड्स से जुड़ी झिझक को तोड़ा'

फिल्म की कहानी एक साधारण ग्रामीण व्यक्ति फुल्लू (शारिब हाशमी) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी मासूमियत के लिए जाना जाता है। वह गांव में महिलाओं के बीच लोकप्रिय है, क्योंकि वह शहर जाकर उनके लिए जरूरी सामान लाने का काम करता है। गांव में उसके इस स्वभाव के कारण लोग उसका मजाक बनाते है लेकिन वह अपने तरीके से सबकी मदद करता रहता है। उसकी मां उसे अक्सर डांटती रहती है और चाहती है कि वह जिम्मेदार बने और काम करे लेकिन फुल्लू की जिंदगी उसी सरलता में चलती रहती है।
कहानी में बदलाव तब आता है जब फुल्लू को शहर में पीरियड्स से जुड़ी स्वच्छता के बारे में जानकारी मिलती है। उसे पता चलता है कि गांव की महिलाएं पुराने कपड़ों का इस्तेमाल करती हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इस जानकारी के बाद फुल्लू का जीवन बदल जाता है और वह तय करता है कि वह सैनिटरी पैड बनाने की प्रक्रिया सीखेगा और गांव की महिलाओं के लिए इसे उपलब्ध कराने की कोशिश करेगा। वह शहर जाकर फैक्ट्री में काम करता है और वहां से सीखकर गांव लौटता है।
गांव लौटने के बाद उसे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लोग उसकी बातों पर विश्वास नहीं करते और कई बार उसका मजाक भी उड़ाया जाता है। हालांकि फुल्लू पीछे नहीं हटता और लगातार महिलाओं को जागरूक करने की कोशिश करता रहता है।
--आईएएनएस
ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
Advertisement
यह भी प�?े
हॉलीवुड
Advertisement
Traffic
Features


