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कार्तिक पूर्णिमा 2025: जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त, भगवान शिव-विष्णु की आराधना और क्या है इस दिन का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के दिन संध्याकाल की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
—पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
—चंद्रोदय का समय: शाम 5 बजकर 11 मिनट पर
इस समय भगवान विष्णु और भगवान शिव की संयुक्त आराधना करने से जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है। शाम को घर के अंदर और बाहर दीपक जलाने से देवता प्रसन्न होते हैं और घर में लक्ष्मी का वास होता है।
कार्तिक पूर्णिमा की पूजन विधि
पवित्र स्नान का विधान:
इस दिन सूर्योदय से पहले गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यदि संभव न हो, तो स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर घर में स्नान करें।
भगवान विष्णु की आराधना:
भगवान विष्णु की पूजा तुलसी पत्र, चंदन, धूप, दीप, रोली, अक्षत, पुष्प, पंचामृत, फल और नैवेद्य अर्पित करके करें। माना जाता है कि तुलसी पत्र के बिना भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है।
भगवान शिव की उपासना:
शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से समस्त दोषों का निवारण होता है।
दीपदान और आरती:
संध्या के समय घर के द्वार, मंदिर, आंगन, तुलसी चौरा और छत पर दीप जलाएं। इसके बाद भगवान की आरती करें और परिवार सहित मंगलकामना करें।
दान और सेवा:
इस दिन गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करने का विशेष फल मिलता है।
कार्तिक पूर्णिमा के मंत्र
पूजन के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है —
• ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
• ॐ नमः शिवाय
इन मंत्रों के उच्चारण से मन की शुद्धि होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व अत्यंत गहरा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। इस कारण इस पर्व को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। त्रिपुरासुर के वध के बाद देवताओं ने दीप जलाकर भगवान शिव का स्वागत किया था, और तभी से इस दिन दीपदान की परंपरा आरंभ हुई।
इसके अलावा यह दिन भगवान विष्णु की उपासना के लिए भी सर्वोत्तम माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि कार्तिक मास में भगवान विष्णु ब्रह्म मुहूर्त में पृथ्वी पर आते हैं, इसलिए इस दिन स्नान, दान और दीपदान से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
तुलसी पूजन और देव दीपावली का योग
इस वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर तुलसी पूजन और देव दीपावली का संयोग बन रहा है। काशी में इस दिन गंगा घाटों पर लाखों दीप जलाकर देवताओं का स्वागत किया जाता है। यह पर्व लोक आस्था का अद्भुत प्रतीक है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय और प्रकाश पर अंधकार की जीत का संदेश देता है।
कार्तिक पूर्णिमा का पर्व न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी अत्यंत शुभ होता है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव और देवी लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में समृद्धि, शांति और आनंद का संचार होता है। स्नान, दान और दीपदान के माध्यम से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा का यह पर्व हर श्रद्धालु के लिए आध्यात्मिक उन्नति का अवसर लेकर आता है।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और लोक आस्था पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पाठक इसे अपनी श्रद्धा और विश्वास के अनुसार ग्रहण करें।
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