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मानसून में गुलज़ार होगा उपरमाल: भीलवाड़ा के झरने और प्रकृति बनेंगे पर्यटन का नया आकर्षण
मानसून के दौरान सबसे अधिक आकर्षण का केंद्र बनने वाले स्थलों में मेनाल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। ऊँची चट्टानों से गिरता विशाल जलप्रपात, प्राचीन मंदिर समूह और प्राकृतिक घाटियाँ यहाँ आने वाले प्रत्येक पर्यटक को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। बारिश के दिनों में मेनाल का सौंदर्य कई गुना बढ़ जाता है और यहाँ का दृश्य कैमरे में कैद करने योग्य होता है।
इसी प्रकार भीमलत जलप्रपात मानसून में अपनी पूरी भव्यता के साथ दिखाई देता है। गहरी घाटी में गिरता जल, चारों ओर फैली हरियाली और प्राकृतिक चट्टानों का संगम इसे रोमांच और प्रकृति दोनों का अनूठा केंद्र बनाता है। यह स्थान ट्रैकिंग और प्रकृति अवलोकन के शौकीनों के लिए भी विशेष महत्व रखता है।
उपरमाल क्षेत्र में स्थित भड़कूंड भी बरसात के मौसम में बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। चट्टानों के बीच बहता स्वच्छ जल, छोटे-छोटे प्राकृतिक कुंड और शांत वातावरण परिवारों तथा युवाओं के लिए पसंदीदा पिकनिक स्थल बन जाते हैं। वहीं भड़ख्या क्षेत्र का बहता जल और प्राकृतिक चट्टानी संरचनाएँ मानसून के दिनों में मनोहारी दृश्य प्रस्तुत करती हैं।
प्राकृतिक स्थलों के साथ-साथ यह क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के लिए भी प्रसिद्ध है। बाड़ोली (बाड़ोली मंदिर समूह) जैसे प्राचीन मंदिर भारतीय स्थापत्य कला की उत्कृष्ट मिसाल हैं। हरियाली से घिरे ये मंदिर मानसून में और अधिक आकर्षक दिखाई देते हैं। यहाँ आने वाले पर्यटक प्रकृति के साथ इतिहास और संस्कृति का भी आनंद ले सकते हैं।
उपरमाल क्षेत्र की विशेषता केवल झरनों तक सीमित नहीं है। वर्षा के बाद खेतों में लहलहाती फसलें, ग्रामीण जीवन की सहजता, मिट्टी की सोंधी खुशबू और पहाड़ियों पर फैली हरियाली पूरे क्षेत्र को एक जीवंत प्राकृतिक पर्यटन स्थल में बदल देती है। स्थानीय ग्रामीणों के लिए भी यह मौसम अतिरिक्त आय का अवसर लेकर आता है, क्योंकि पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय व्यापार, खान-पान और छोटे व्यवसायों को गति मिलती है।
हालाँकि पर्यटन के बढ़ते दायरे के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है। झरनों और प्राकृतिक स्थलों पर प्लास्टिक कचरा छोड़ना, शराब सेवन करना, तेज संगीत बजाना या खतरनाक स्थानों पर सेल्फी लेना दुर्घटनाओं और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। इसलिए पर्यटकों को स्वच्छता बनाए रखने, प्रशासन द्वारा निर्धारित सुरक्षा निर्देशों का पालन करने तथा प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण में सहयोग करना चाहिए।
यदि मानसून के मौसम में राजस्थान के किसी ऐसे स्थान की तलाश हो जहाँ प्रकृति, इतिहास, हरियाली और शांति एक साथ मिलें, तो भीलवाड़ा का उपरमाल क्षेत्र निश्चित रूप से एक उत्कृष्ट विकल्प है। यहाँ के झरने, मंदिर, घाटियाँ और ग्रामीण परिवेश न केवल मानसून की सुंदरता को नई पहचान देते हैं, बल्कि यह भी सिद्ध करते हैं कि राजस्थान केवल रेगिस्तान ही नहीं, बल्कि वर्षा ऋतु में अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का भी प्रदेश है। सावन की हर फुहार के साथ उपरमाल का यह अंचल जीवंत हो उठता है और आने वाले प्रत्येक पर्यटक को अविस्मरणीय अनुभव देकर लौटाता है।
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