Sourav Ganguly ethnic look sets social media on fire, fans cannot keep calm -m.khaskhabar.com
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सोशल मीडिया पर सौरव गांगुली के एथनिक लुक ने लगाई आग, शांत नहीं हो पा रहे प्रशंसक!

khaskhabar.com: शनिवार, 13 सितम्बर 2025 6:24 PM (IST)
सोशल मीडिया पर सौरव गांगुली के एथनिक लुक ने लगाई आग, शांत नहीं हो पा रहे प्रशंसक!
नई दिल्ली, । क्रिकेट की सफेद जर्सी को छोड़िए, क्योंकि फैशन में सौरव गांगुली ने एक बिल्कुल नई पारी शुरू की है। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान, जिन्हें प्यार से दादा कहा जाता है, एक शाही एथनिक लुक में नजर आने के बाद वायरल हो गए हैं, जिसके बाद फैंस उन्हें 'पिच और स्टाइल का बादशाह' कहने लगे हैं। इस ट्रेंडिंग फोटोशूट में गांगुली ने अपने बोर्डरूम ब्लेजर की जगह बारीक डिजाइन वाले धोती-कुर्ते पहने, और सच कहूं तो उन्होंने कमाल कर दिया। बारीक कढ़ाई से लेकर सहज स्वैग तक, कोलकाता के राजकुमार हर तरह से त्योहारों के मौसम के शोस्टॉपर लग रहे थे। सोशल मीडिया पर बिना समय गंवाए तारीफों की बौछार हो गई, मीम्स प्रशंसकों के एडिट में बदल गए और टाइमलाइन गांगुली के सदाबहार आकर्षण का जश्न मनाने वाले पोस्ट से भर गईं। एक प्रशंसक ने खुशी से कहा, "यह आदमी मैच और दिल दोनों ही बराबर जीत सकता है," जबकि दूसरे ने उन्हें 'बेहतरीन स्टाइल दादा' का खिताब दिया।
बेशक, बड़ा सवाल यह है कि क्या हो रहा है? त्योहारों का मौसम नजदीक आ रहा है, ऐसे में कई लोग अनुमान लगा रहे हैं कि यह शूट किसी ब्रांड अभियान या किसी खास सहयोग से जुड़ा हो सकता है। आधिकारिक घोषणा अभी गुप्त है, लेकिन चर्चा बढ़ती ही जा रही है।
एक बात तो तय है कि गांगुली खुद को नए सिरे से गढ़ना जानते हैं। लॉर्ड्स में अपनी जर्सी लहराने से लेकर धोती पहनकर देसी अंदाज को नई परिभाषा देने तक, दादा ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि दिग्गज कभी भी फैशन से बाहर नहीं होते।
गांगुली को भारत के सबसे प्रभावशाली क्रिकेट कप्तानों में से एक माना जाता है। 2000 से 2005 के बीच राष्ट्रीय टीम का नेतृत्व करते हुए उन्होंने अपने आक्रामक नेतृत्व से भारतीय क्रिकेट को बदल दिया और कई भावी सितारों की नींव रखी। उनकी कप्तानी में भारत 2003 के आईसीसी विश्व कप के फाइनल में पहुंचा और विदेशों में यादगार टेस्ट जीत हासिल की।
2008 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद गांगुली प्रशासन में सक्रिय रहे और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के अध्यक्ष बने। मैदान के अंदर और बाहर अपने करिश्मे के लिए जाने जाने वाले, उन्हें खेल से परे एक सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
--आईएएनएस

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