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चांदी पर बैठना पसंद नहीं, मेरा लक्ष्य सोना: रवि दहिया

khaskhabar.com: गुरुवार, 11 दिसम्बर 2025 1:36 PM (IST)
चांदी पर बैठना पसंद नहीं, मेरा लक्ष्य सोना: रवि दहिया
नई दिल्ली । रवि कुमार दहिया भारतीय कुश्ती का ऐसा नाम है जिनसे भविष्य में देश को ओलंपिक जैसे वैश्विक मंच पर स्वर्णिम प्रदर्शन की उम्मीद है। रवि दहिया के नाम से मशहूर इस पहलवान का जन्म हरियाणा के सोनीपत जिले के नहरी में 12 दिसंबर 1997 को हुआ था। हरियाणा को भारतीय कुश्ती का केंद्र माना जाता है। रवि को अपने प्रदेश के साथ ही कुश्ती का प्रभाव अपने घर में भी देखने को मिला। रवि के पिता राकेश दहिया तो किसान हैं, लेकिन उनकी मां ऊर्मिला देवी और चाचा मुकेश दहिया कुश्ती से जुड़े रहे हैं। इस वजह से रवि को कुश्ती विरासत में मिली है, जिसे उन्होंने अपने अथक परिश्रम से सफल और समृद्ध बनाया है। रवि ने महज 10 साल की उम्र में दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में कुश्ती प्रशिक्षण के लिए दाखिला लिया। घर से दूर प्रशिक्षण के लिए पहुंचे रवि के लिए उनके पिता रोजाना 39 किलोमीटर की दूरी तय कर दिल्ली स्टेडियम में उनके लिए घर से ताजा दूध व फल लेकर आते थे। यह प्रक्रिया तब तक जारी थी। रवि के एक बड़े पहलवान के रूप में लोकप्रिय होने तक यह प्रक्रिया जारी रही। ऐसे में रवि के पिता की साधना उन्हें पहलवान बनाने की दिशा में एक बड़ी प्रेरणा है।
सतपाल सिंह की देखरेख में में रवि की कोचिंग शुरू हुई थी। सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त जैसे पहलवानों ने सतपाल सिंह से ही प्रशिक्षण लिया था और आगे चलकर ओलंपिक पदक विजेता बने। ओलंपिक पदक विजेताओं में रवि दहिया का नाम भी शामिल है।
रवि को सबसे पहले बड़ी पहचान 2018 में अंडर-23 विश्व चैंपियनशिप में मिली। 57 किलोग्राम भार वर्ग में उन्होंने रजत पदक जीता था। 2019 में विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में अपनी जगह सुनिश्चित की थी। रवि एशियाई चैंपियनशिप के बादशाह हैं। 2018, 2020, और 2021 में उन्होंने स्वर्ण पदक जीते थे।
दहिया के जीवन का सबसे बड़ा क्षण टोक्यो ओलंपिक था। 57 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में उन्होंने रजत पदक जीत वैश्विक स्तर पर अपनी ताकत का लोहा मनवाया। हालांकि फाइनल में मिली हार से रवि खुश नहीं थे। उन्होंने कहा था, 'मैं चांदी पर नहीं बैठ सकता। सोना ही मेरा लक्ष्य है।'
टोक्यो ओलंपिक के बाद 2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में रवि दहिया ने स्वर्ण पदक जीता।
2024 में पेरिस में हुए ओलंपिक में जगह बनाने में सफल नहीं रहे रवि अब अपना भार वर्ग बदलकर लॉस एंजिल्स ओलंपिक की तैयारी कर रहे हैं। रवि 57 किग्रा की जगह अब 65 किग्रा भार वर्ग में हिस्सा ले सकते हैं। फ्रीस्टाइल कुश्ती के इस धाकड़ पहलवान से देश को अगले ओलंपिक में स्वर्ण पदक की उम्मीद है।
भारत सरकार रवि दहिया को पद्मश्री और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है।
--आईएएनएस

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