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अवनि लेखरा : बचपन में हादसे ने बदली जिंदगी, फिर पैरालंपिक गोल्ड मेडलिस्ट बनकर खुद बनाई अपनी तकदीर

पिता का मानना था कि अगर अवनि को किसी खेल से जोड़ा जाए, तो उनकी मायूसी दूर हो सकती है। उन्होंने बेटी को शूटिंग शुरू करने के लिए कहा।
इस हादसे के करीब 3 साल बाद अवनि शूटिंग में अपना करियर बनाने की ठान चुकी थीं। वह ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा से काफी प्रेरित थीं।
2020 टोक्यो पैरालंपिक में अवनि ने गोल्ड जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 इवेंट के फाइनल में 249.6 के स्कोर के साथ गोल्ड जीता। वह पैरालंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। इसी पैरालंपिक में उन्होंने 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन एसएच 1 में ब्रॉन्ज मेडल भी अपने नाम किया।
यह पैरालंपिक कोरोना महामारी के चलते साल 2021 में हुआ था। तीन साल बाद पेरिस में पैरालंपिक गेम्स का आयोजन होना था, जिससे 5 महीने पहले अवनि लेखरा को गाल ब्लैडर की पथरी निकलवाने के लिए ऑपरेशन करवाना पड़ा, जिससे उनकी ट्रेनिंग प्रभावित हुई, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया।
अवनि ने 2024 पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल एसएच 1 इवेंट के फाइनल में 249.7 अंक के साथ पैरालंपिक रिकॉर्ड बनाते हुए गोल्ड मेडल जीता।
इसी के साथ अवनि लेखरा पैरालंपिक गेम्स में 2 गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। वह पैरालंपिक में 3 मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं।
शूटिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अवनि लेखरा को साल 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार, जबकि साल 2022 में पद्म श्री पुरस्कार से नावाजा गया। अवनि आज देश के लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत हैं।
--आईएएनएस
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