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विश्व तंबाकू निषेध दिवस (31 मई) : कैलोरी जलाएं, तंबाकू नहीं, भारत में हर साल तंबाकू से 10 लाख मौतें

तंबाकू से जुड़ी वैश्विक व राष्ट्रीय चुनौतियां: पिछले वर्षों की मुख्य थीम
तंबाकू नियंत्रण की वैश्विक चुनौतियों को समझने के लिए प्रतिवर्ष विशेष थीम निर्धारित की जाती है, जो इस प्रकार हैं:
वर्ष 2026 की थीम: "आकर्षण का पर्दाफाश करना — निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला करना"।
वर्ष 2025 की थीम: "ब्राइट प्रोडक्ट्स, डार्क इंटेंशंस — अनमास्किंग दी अपील"।
वर्ष 2024 की थीम: "बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना"।
दुनिया के 12% धूम्रपान करने वाले भारत में
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, पूरी दुनिया में हर साल लगभग 80 लाख लोग तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण असमय काल का ग्रास बनते हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि दुनिया के कुल धूम्रपान करने वालों का 12% हिस्सा भारत में रहता है। हमारे देश में हर साल तंबाकू चबाने और धूम्रपान (सिगरेट, बीड़ी, हुक्का, सिगार) के कारण 10 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।
सावधान! तंबाकू से होने वाली 5 सबसे घातक बीमारियां
चिकित्सकीय शोध बताते हैं कि तंबाकू का सेवन करने से मानव शरीर में कम से कम 15 प्रकार के कैंसर, दिल के दौरे और फेफड़ों के गंभीर रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। डॉ. लियाक़त अली ने तंबाकू से होने वाली पांच सबसे गंभीर बीमारियों की विस्तार से जानकारी दी:
1. फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer)
दुनिया भर में फेफड़ों के कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से 87% मौतों का सीधा कारण तंबाकू का धूम्रपान है। आंकड़ों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को सिगरेट या बीड़ी की लत है, तो आज से ठीक पांच साल बाद उसके जीवित रहने की संभावना पांच में से एक (20% से भी कम) रह जाती है।
2. मुँह और गले का कैंसर (Oral Cancer)
मुँह के कैंसर से पीड़ित होने वाले 90% मरीज तंबाकू चबाने वाले (डिपिंग करने वाले) होते हैं। जो लोग तंबाकू, गुटखा या खैनी को मसूड़ों और दांतों के बीच दबाकर रखते हैं, उनमें मुँह और गले का कैंसर होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
3. दिल की बीमारियां और हार्ट अटैक
धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ने की आशंका सामान्य व्यक्ति की तुलना में दोगुनी हो जाती है। सिगरेट में मौजूद 'निकोटीन' शरीर में 'एड्रेनालिन' हार्मोन को उत्तेजित करता है, जिससे ब्लड प्रेशर (रक्तचाप) अचानक बढ़ जाता है और दिल की धड़कन तेज हो जाती है। हृदय रोगों से होने वाली हर पांच में से एक मौत का जिम्मेदार तंबाकू है।
4. ब्रेन स्ट्रोक और लकवा (Stroke)
तंबाकू का धुआं धमनियों को सिकोड़ देता है, जिससे मस्तिष्क तक होने वाली रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप 'स्ट्रोक' होता है, जिससे मरीज को लकवा (पैरालिसिस), बोलने में असमर्थता, मानसिक कार्यक्षमता का रुकना या अचानक मौत का सामना करना पड़ सकता है।
5. क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिज़ीज़ (COPD)
सीओपीडी सांस से जुड़ी एक लाइलाज और बेहद तकलीफदेह बीमारी है, जिसमें मरीज को सांस लेने में भारी मशक्कत करनी पड़ती है। सीढ़ियां चढ़ना, चलना या दैनिक कार्य करना भी दूभर हो जाता है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, COPD के 80% मामलों की मुख्य वजह सिर्फ और सिर्फ तंबाकू धूम्रपान है।
"तंबाकू मुक्त पीढ़ी" के निर्माण की शपथ
उल्लेखनीय है कि डब्ल्यूएचओ ने सर्वप्रथम 7 अप्रैल 1988 को 'विश्व धूम्रपान निषेध दिवस' घोषित किया था, जिसे बाद में एक संकल्प पारित कर प्रतिवर्ष 31 मई को आधिकारिक तौर पर 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस' के रूप में नामित किया गया।
भारत में इस अवसर पर देश भर के स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता रैलियां, शपथ ग्रहण समारोह, और चित्रकला प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। समाज को इस जहर से बचाने के लिए युवाओं द्वारा प्रमुखता से दो नारे बुलंद किए जा रहे हैं—
"कैलोरी जलाएं, तंबाकू नहीं!" > "जीवन को हां कहें, तंबाकू को ना कहें!"
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