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जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों फोड़ी जाती है दही हांडी? जानिए इस परंपरा के पीछे की कहानी

दही हांडी उत्सव में इसी बाल लीला को प्रतीकात्मक रूप से दोहराया जाता है। एक मटकी में दही, मक्खन और दूसरी चीजें भरकर उसे रस्सी की मदद से काफी ऊंचाई पर बांधा जाता है। इसके बाद युवाओं की टोली, जिसे अक्सर गोविंदा कहा जाता है, मानव पिरामिड बनाकर मटकी तक पहुंचने की कोशिश करती है।
सबसे ऊपर चढ़ा गोविंदा आखिर में मटकी फोड़ता है। मटकी टूटते ही दही और दूसरी सामग्री नीचे गिरती है और पूरा माहौल जयकारों, ढोल-नगाड़ों और भजनों से गूंज उठता है।
महाराष्ट्र में दही हांडी का उत्सव खास तौर पर प्रसिद्ध है। इस दौरान काफी ऊंची-ऊंची दही हांडी बांधी जाती हैं। उसे तोड़ने के लिए अलग-अलग टोलियां बनती हैं जो तोड़ लेता है उसे खास इनाम दिया जाता है। हालांकि अब देश के कई हिस्सों में इसकी धूम देखने को मिलती है।
--आईएएनएस
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