Why is Dahi Handi broken the day after Janmashtami, Discover the story behind this tradition.-m.khaskhabar.com
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जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों फोड़ी जाती है दही हांडी? जानिए इस परंपरा के पीछे की कहानी

khaskhabar.com: बुधवार, 02 सितम्बर 2026 1:40 PM (IST)
जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों फोड़ी जाती है दही हांडी? जानिए इस परंपरा के पीछे की कहानी
मुंबई । जन्माष्टमी का त्योहार आते ही भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की याद ताजा हो जाती है। कान्हा की नटखट शरारतें, गोपियों से माखन चुराना और दोस्तों के साथ मिलकर ऊंची मटकी फोड़ना- इन सबका जिक्र आज भी बड़े प्यार से किया जाता है। इसी बाल लीला से जुड़ी है दही हांडी की परंपरा, जिसे जन्माष्टमी के अगले दिन बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण को माखन और दही बेहद पसंद था। बचपन में वे अपने सखाओं के साथ मिलकर गोकुल की गलियों में घूमते थे। जब उन्हें किसी घर में माखन-दही की मटकी दिखाई देती, तो वे मौका देखकर उसे चुरा लेते थे। उनकी इस शरारत से गोपियां परेशान रहती थीं। कहा जाता है कि गोपियों ने कान्हा से माखन बचाने के लिए मटकी को जमीन से काफी ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया। लेकिन नटखट कान्हा कहां मानने वाले थे। वे अपने दोस्तों को इकट्ठा करते और सभी मिलकर एक-दूसरे के ऊपर चढ़कर मानव पिरामिड बनाते। सबसे ऊपर पहुंचने वाला साथी मटकी को फोड़ देता और फिर सभी मिलकर माखन-दही का आनंद लेते।
दही हांडी उत्सव में इसी बाल लीला को प्रतीकात्मक रूप से दोहराया जाता है। एक मटकी में दही, मक्खन और दूसरी चीजें भरकर उसे रस्सी की मदद से काफी ऊंचाई पर बांधा जाता है। इसके बाद युवाओं की टोली, जिसे अक्सर गोविंदा कहा जाता है, मानव पिरामिड बनाकर मटकी तक पहुंचने की कोशिश करती है।
सबसे ऊपर चढ़ा गोविंदा आखिर में मटकी फोड़ता है। मटकी टूटते ही दही और दूसरी सामग्री नीचे गिरती है और पूरा माहौल जयकारों, ढोल-नगाड़ों और भजनों से गूंज उठता है।
महाराष्ट्र में दही हांडी का उत्सव खास तौर पर प्रसिद्ध है। इस दौरान काफी ऊंची-ऊंची दही हांडी बांधी जाती हैं। उसे तोड़ने के लिए अलग-अलग टोलियां बनती हैं जो तोड़ लेता है उसे खास इनाम दिया जाता है। हालांकि अब देश के कई हिस्सों में इसकी धूम देखने को मिलती है।
--आईएएनएस

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