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आईएएस अधिकारियों के बच्चे आखिर क्यों आईएएस नहीं बनना चाहते?

संघ लोक सेवा आयोग की कठिन, अनिश्चित और समयसाध्य परीक्षा उनके लिए आवश्यक विकल्प नहीं, बल्कि एक चुनौतीपूर्ण यात्रा जैसी लगती है। इसलिए उनकी राहें निजी क्षेत्र, तकनीकी क्षेत्र, अनुसंधान, विधि-विज्ञान या उद्यमिता की ओर अधिक मुड़ जाती हैं—जहाँ आय अधिक है, स्वतंत्रता अधिक है और स्थानांतरण या राजनीतिक दबाव जैसी चुनौतियाँ कम हैं। तीसरी सच्चाई यह है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा के भीतर की जो प्रशासनिक सीमाएँ हैं—फाइलों का व्यवहार, विवश निर्णय, भ्रष्ट तंत्र का दबाव—वे सब इन परिवारों के बच्चे प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करते हैं।
जब वे देखते हैं कि उनके माता-पिता कई बार अपनी इच्छा के अनुसार निर्णय नहीं ले पाते, तो यह उनके भीतर प्रशासनिक सेवा की “शक्ति” को कम प्रभावी रूप में प्रस्तुत करता है। समाज इसे चाहे जितना सम्मानजनक माने, परिवार के भीतर इसका वास्तविक चित्र कई बार निराशाजनक होता है। चौथा पहलू है—नई पीढ़ी की मूल्य-दृष्टि। आज की युवा पीढ़ी सरकारी पदों की स्थिरता से अधिक वैश्विक अवसरों, रचनात्मक स्वतंत्रता, डिजिटल माध्यमों पर आधारित करियर और नव–उद्यम संस्कृति की ओर आकर्षित है। वे जोखिम उठाने को तैयार हैं, परंतु बंधी-बंधाई व्यवस्था में रहना नहीं चाहते।
भारतीय प्रशासनिक सेवा जैसी सेवा जहाँ नियम कठोर हैं, प्रक्रिया विस्तृत है और ऊर्जा का बड़ा भाग व्यवस्था को संचालित रखने में व्यतीत होता है—वहाँ उन्हें अपनी क्षमता का पूर्ण विस्तार नहीं दिखाई देता। यह भी उल्लेखनीय है कि स्वयं अनेक भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी अपने बच्चों को इस सेवा में आने के लिए प्रोत्साहित नहीं करते। वर्षों की थकान, संघर्ष और भारी दबाव के बाद वे अपने बच्चों के लिए अधिक संतुलित, स्वतंत्र और अपेक्षाकृत शांत जीवन की कल्पना करते हैं। यह माता-पिता की सहज मनोवैज्ञानिक प्रवृत्ति है, और बच्चों के करियर चयन को गहराई से प्रभावित करती है। यह पूरा परिदृश्य एक व्यापक सामाजिक परिवर्तन की ओर संकेत करता है।
वह समय अब समाप्त हो रहा है जब भारतीय प्रशासनिक सेवा को करियर का सबसे उत्कृष्ट विकल्प माना जाता था। आज अनेक प्रतिष्ठित और प्रभावी करियर उपलब्ध हैं जिनमें स्वतंत्रता, रचनात्मकता, सम्मान और आय—सब कुछ प्रचुर मात्रा में है। इस परिवर्तित परिदृश्य ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के आकर्षण को कुछ हद तक कम किया है, विशेष रूप से उन परिवारों में जिन्होंने इसकी चमक के पीछे की कठोर थकान को निकट से महसूस किया है। फिर भी यह सत्य है कि यह रुझान प्रशासनिक सेवा की महत्ता को कभी समाप्त नहीं करता।
भारतीय प्रशासनिक सेवा देश की प्रशासनिक रीढ़ है और इसमें आने वाले युवा राष्ट्र को दिशा देने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अंतर केवल इतना है कि अब इस सेवा की राह वही चुनता है जो इसे मन से अपनाना चाहता है—न कि वह जो सामाजिक दबाव या मजबूरी में प्रवेश करता है।
अंततः, भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों के बच्चों का उसी सेवा में न जाना किसी प्रकार की असफलता का संकेत नहीं है, बल्कि बदलते भारत की सूक्ष्म मानसिकता का परिचायक है—एक ऐसा भारत जहाँ विकल्प अधिक हैं, अपेक्षाएँ नवीन हैं, और करियर का अर्थ केवल प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी है। यह परिवर्तन सकारात्मक है, क्योंकि यह दिखाता है कि नई पीढ़ी उस संसार का स्वप्न देखती है जहाँ पेशा शक्ति से नहीं, बल्कि संतुलन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत संतोष से निर्धारित होता है।
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