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जिसे दिल से चाहने वाले बेशुमार हों, उस पर शब्द खर्च करना लाजिमी है

लेकिन हाल ही यहां एक समाचार ने चौंका दिया कि उनकी मुम्बई स्थित फिल्म सिटी में आदमकद प्रतिमा स्थापित की गई है। जबकि यह इतनी जल्दी संभव नहीं है। लेकिन महाराष्ट्र के कुछ समाचार-पत्रों में ऐसे समाचार प्रकाशित भी हुए और यूट्यूब पर भी कुछ ऐसे वीडियो वायरल हुए हैं। उसमें बताया गया है कि उन्हें फिल्म नगरी की ओर से यह अनुपम श्रद्धांजलि इसलिए अर्पित की गई कि धर्मेन्द्र की सौ फिल्मों की शूटिंग इसी फिल्म सिटी में हुई है।
दूसरी ओर पंजाब और हरियाणा के समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ कि धर्मेन्द्र के गांव मानुके में भी प्रख्यात मूर्तिकार इक़बाल सिंह गिल ने उनकी एक मूर्ति तैयार की है जिसे वे उनके गांव में स्थापित करेंगे। इसके अलावा जयपुर में भी पंकज भार्गव ने धर्मेन्द्र की 5 फीट 6 इंच ऊंची स्टैच्यू तैयार की है जिसे वे उनके परिवार को सौंपना चाहते हैं। वे एक मात्र ऐसे कलाकार थे जिन्होंने अपने जीवन में कभी किसी का बुरा नहीं किया। किसी का दिल नहीं दुखाया। छोटे-बड़े सभी को दिल से मान दिया। धर्मेन्द्र ने 1954 में प्रकाश कौर से शादी की थी। मृत्यु से पहले तक उनकी 450 करोड़ नेटवर्थ थी। उन्होंने सन 1960 में फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में बतौर हीरो काम किया और उसके ठीक बाद खंडाला में अपना फार्महाउस बनाया। जिसमें रहन-सहन पूर्णतः देहाती था। वही चूल्हा और उस पर वही मक्की और बाजरे की रोटी। इत्तेफाक देखिए कि धर्मेन्द्र ने अपने फिल्मी करियर का अंतिम पड़ाव उसी फार्म-हाउस में बिताया और अंतिम सांस भी उसी फार्म-हाउस में ली। धर्मेन्द्र के उनकी पहली पत्नी प्रकाश कौर से दो बेटे और दो बेटियां हैं।
सन्नी देओल और बॉबी देओल, ये दोनों फ़िल्मों से जुड़े हुए हैं। जबकि उनकी एक बहन अजीता देओल अमेरिका में साइकॉलजी की टीचर हैं और दूसरी बहन विजेता देओल दिल्ली में रहती हैं। वे राजकमल होर्डिंग्स एंड ट्रेडिंग्स प्राइवेट लिमिटेड की डारेक्टर हैं। धर्मेन्द्र ने विजेता के नाम से ही अपनी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी शुरू की जिसके तहत उन्होंने पहली फिल्म बेताब बनाई थी। श्यामू, तूने मेरे इलाक़े में आके चोरी की। मेरे आदमियों को मारा। माल वापस करोगेॽ आदमियों का हिसाब मै तुमसे बाद में लूंगा। ( फिल्म फूल और पत्थर )
शान्ति तुम इन्हें नहीं जानती, इन्हें मै जानता हूं। काश, ये थप्पड़ 20 साल पहले मुझे किसी ने मारा होता तो मै वो नहीं होता जो आज हूं। ये दुनिया बहुत बुरी है शांति, जो कुछ देती है बुरा बनने के बाद ही देती है। ( फूल और पत्थर ) ये मिट्टी रेगिस्तान की है। यहां बारिश की पहली बूंद को तपते रेगिस्तान में गिर कर फना होना पड़ता है। ( गुलामी ) कभी जमीन से बात की है ठाकुर ॽ ( गुलामी ) एक एक को मारूंगा, चुन-चुन के मारूंगा। ( शोले ) ओए, इलाका कुत्तों का होता है, शेर का नहीं। ( यमला पगला दीवाना )
दिल के मामले में हमेशा दिल की सुननी चाहिए। ( लाइफ इन ए मेट्रो ) पहले एक हिन्दुस्तानी को समझ जाओ, हिन्दी अपने आप समझ में आ जाएगी। ( अपने ) दिल भी कोई चीज है जो हर किसी को दे दूं ॽ ( अनुपमा ) मां के आंचल से बड़ी इस दुनिया में कोई छांव नहीं। ( यादों की बारात ) तक़दीर में अगर मौत लिखी है तो कोई बचा नहीं सकता और ज़िन्दगी लिखी है तो कोई मार नहीं सकता। ( धर्मवीर ) उमा जी, शायद आपने कभी खुद को हंसते हुए नहीं देखा, कभी चुपके से आईने के सामने जाकर देखिये कि आप हंसते हुए कितनी खूबसूरत लगती हैं। ( चुपके-चुपके)
ये दुनियां बड़ी ज़ालिम है शांति, इसने भूख से बिलखते मेरे बचपन का मज़ाक़ उड़ाया है। ( फूल और पत्थर ) धर्मेन्द्र की फिल्मों के ये वे संवाद हैं जो उन पर फिल्माए गए और उन्होंने इन सभी संवादों को इस अदा से बोला कि वे यादगार बन गए। धर्मेन्द्र ने एक बार कहा था कि वे फिल्मी एक्ट्रेस कुमकुम के हमेशा ऋणी रहेंगे। क्योंकि एक दौर ऐसा भी था जब उनके साथ कोई हिरोइन काम करना नहीं चाहती थी। तब कुमकुम ने फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे में उनकी हिरोइन का किरदार निभाया था और जब कुमकुम की मृत्यु हुई तब वे फूट-फूट कर रोए।
पिछले 15 दिनों से सोशल मीडिया पर उन सभी फिल्म कलाकारों के विचार वायरल हो रहे हैं जिन्होंने धर्मेन्द्र के साथ काम किया या उन्हें करीब से जानने थे और उनके व्यवहार से प्रभावित थे। मुझे याद है धर्मेंद्र को लेकर एक बार फिल्मों में फाइट डारेक्टर रहे शेट्टी ने कहा था कि हिन्दी फिल्मोद्योग में एकमात्र धर्मेन्द्र ही ऐसे कलाकार हैं जिनके साथ फाइट करने में मजा आता है। वर्ना यहां ऐसे कलाकार ज्यादा हैं जिन्हें मैं एक फूंक दूं तो वे उड़ जाएं। दिलीप कुमार ने भी धर्मेन्द्र की तारीफ में कसीदे पढ़े थे कि इस बंदे के चेहरे पर रूहानी नूर है। काश, परवरदिगार ने मुझे धर्मेन्द्र जैसा बनाया होता।
देवानंद ने कहा था कि धर्मेन्द्र को शब्दों में नहीं समेटा जा सकता। ऐसे ही प्राण ने कहा कि स्टारडम का बादशाह, लेकिन लेशमात्र भी घमंड नहीं। राजकपूर ने कहा था कि इस इंडस्ट्री में एक मात्र फरिश्ता। मैने मेरा नाम जोकर के लिए जब उसे साइन किया था तब उसने मेरे पांव छूकर कहा कि बस, यही मेरा मेहनताना है और उसने जिस संजीदगी से फिल्म में सर्कस के मैनेजर का रोल अदा किया बस लाजवाब।
बस यहां एक ही बात अखर रही है कि धर्मेन्द्र का अंतिम संस्कार बग़ैर शोर-शराबे के इतनी शीघ्रता में कर दिया तो श्रद्धांजलि सभा का इतना शो क्योंॽ इसके अलावा चूंकि वे प्रकाश कौर और हेमा मालिनी दोनों के थे। ऐसे में उनकी श्रद्धांजलि सभा एक ही रखनी चाहिए थी। चूंकि यही उन्हें सर्वश्रेष्ठ श्रद्धांजलि होती। उस दिवंगत को तसल्ली भी मिलती कि कम से कम मेरा पूरा परिवार इस मौके पर तो एक साथ है। लेकिन सन्नी देओल और हेमा मालिनी ने अलग-अलग रखीं। यह अच्छा नहीं था।
इसके अलावा कुछ यूट्यूब चैनल्स पर धर्मेन्द्र के अंतिम संस्कार में पीएम मोदी को भी दिखाया गया। जबकि वे वहां नहीं गए थे। यह ग़लत है। यह घटियापन है और निम्न स्तर की चापलूसी है। चूंकि यह फर्जी खबर थी। फिल्मी गीतकार आनंद बक्षी ने 1774 में फिल्म आप की क़सम में यह कितना यथार्थ परक गीत लिखा कि एक बार चले जाते हैं जो दिन-रात सुबह-शाम, वो फिर नहीं आते।
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