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‘कानून और संविधान का उल्लंघन,' सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्षी दलों ने जताया एतराज

khaskhabar.com: शनिवार, 05 सितम्बर 2026 10:09 PM (IST)
‘कानून और संविधान का उल्लंघन,' सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने पर विपक्षी दलों ने जताया एतराज
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक अवैध मस्जिद को गिराए जाने के बाद सियासत तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे कानून और संविधान का उल्लंघन बताया है। आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस नेता आसिम वकार ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने जिलाधिकारी से पूछा कि मस्जिद को क्यों गिराया गया? जिलाधिकारी की ओर से बताया गया कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी थी। अगर सरकारी जमीन पर होने के कारण मस्जिद को गिराया गया है, तो जिलाधिकारी को अपने अधिकार क्षेत्र वाले पूरे जिले की सूची जारी करनी चाहिए, जिसमें यह बताया जाए कि सरकारी जमीन पर कितने धार्मिक स्थल बने हुए हैं। उनका सवाल केवल पार्कों या सड़कों पर बने धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी धार्मिक स्थलों को लेकर है। कांग्रेस नेता ने कहा कि अगर उन्होंने संविधान के तहत शपथ ली है और वे मस्जिद को सिर्फ इसलिए गिरा रहे हैं क्योंकि वह कथित तौर पर सरकारी जमीन पर बनी है, तो दूसरों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? भारत का संविधान सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों के सम्मान की बात करता है। लेकिन, कुछ लोग उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव को एक बार फिर हिंदू-मुस्लिम विवाद की ओर ले जाना चाहते हैं। विकास के मुद्दों पर काम नहीं करने वाले लोग मंदिर-मस्जिद के विवाद खड़े कर चुनाव लड़ना चाहते हैं। देश का हर नागरिक भाजपा के खिलाफ और राहुल गांधी के साथ खड़ा है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम ने भी मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई की निंदा की। उन्होंने कहा कि यह बेहद शर्मनाक है। पहली बात तो यह कि मस्जिद आजादी से पहले बनी थी। अधिकारियों ने संविधान के खिलाफ जाकर और कानून को अपने हाथ में लेकर, भाजपा नेताओं के कहने पर कार्रवाई की। यह बिल्कुल गलत है। किसी को भी किसी दूसरे की इबादत की जगह गिराने या किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है।
पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान ने कहा कि मौजूदा सरकार पर मुसलमानों को निशाना बनाने के आरोप लगातार लग रहे हैं। सरकार ऐसे काम करने की कोशिश करती है, जिससे उसके समर्थक खुश हों, लेकिन आम लोगों में बेरोजगारी, महंगाई, किसानों के मुद्दों और मजदूरों के संघर्ष को लेकर नाराजगी है। भारत सबका है, यहां लोकतंत्र ऐसा है कि कोई भी मुद्दा हमेशा हिंदू-मुस्लिम बंटवारे पर आधारित नहीं रहा। यही भारत की खूबसूरती है। कोई हिंदू को अपना नेता मानता है तो कोई मुस्लिम को अपना नेता मानता है। जो भी देश की भलाई के लिए काम करता है, लोग उसे उसी नजरिए से देखते हैं और उसके साथ चलते हैं।
उन्होंने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को चुनावी एजेंडा भी बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा जिस तेजी से 2014 के बाद आगे बढ़ी थी, अब उसी तेजी से नीचे जा रही है। भाजपा ने हिंदू-मुसलमानों को बांटकर सत्ता हासिल की और अब हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय के लोगों को लगने लगा है कि उनके मुद्दों का इस्तेमाल किया गया।
पूर्व सांसद ने आगे कहा कि कई लोगों ने प्रशासन से संपर्क कर मस्जिद को बचाने की कोशिश की थी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया था कि मस्जिद को केवल अपने कब्जे में लेने की कार्रवाई की जाएगी और उसे गिराया नहीं जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि जो केस दायर किया गया था, वह भी कब्जे में लेने के बारे में था, न कि गिराने के बारे में था। लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने आगे बढ़कर यह कार्रवाई की, जो कानून और संविधान का उल्लंघन है, यह निंदनीय है।
मुस्लिम धर्मगुरु खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी सहारनपुर में मस्जिदों को गिराए जाने की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
--आईएएनएस

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