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जंक्शन में गूंजा वंदे मातरम, विद्यार्थियों से लेकर आमजन सबने थामा तिरंगा

प्रमोद डेलू ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनाने के लिए प्रत्येक देशवासी के मन में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करनी होगी। इसी मंशा के अनुरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐसे आयोजनों की परिकल्पना को साकार किया है। कार्यक्रम का मंच संचालन भीष्म कौशिक ने किया।
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक हरि शंकर, जींद विधायक कृष्ण मिड्ढा, पूर्व विधायक गुरदीप शाहपिनी, पूर्व विधायक धर्मेंद्र मोची, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रमोद डेलू, जनप्रतिनिधि अमित चौधरी, एससी मोर्चा प्रदेशाध्यक्ष कैलाश मेघवाल, एडीएम उम्मेदीलाल मीना, जिला परिषद सीईओ ओ.पी. बिश्नोई, एएसपी जनेश तंवर, सीडीईओ पन्नालाल कड़ेला, प्रदीप ऐरी, बलबीर बिश्नोई, देवेंद्र पारीक, विकास गुप्ता, ओम सोनी, आशीष पारीक, संजय शर्मा, गुलाब सिंवर सहित बड़ी संख्या में स्काउट्स, एनसीसी कैडेट्स, स्कूली विद्यार्थी, आमजन व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
— राष्ट्रगीत वंदे मातरम की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बंकिमचंद्र चटर्जी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की रचना 7 नवंबर, 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर की थी। यह पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के एक अंश के रूप में प्रकाशित हुआ था। मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का स्वरूप बताते हुए इस गीत ने भारत की एकता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की भावना को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी। शीघ्र ही यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया।
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