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योगी आदित्यनाथ के लिए अग्नि परीक्षा हैं उत्तर प्रदेश के चुनाव

khaskhabar.com: गुरुवार, 16 जुलाई 2026 1:41 PM (IST)
योगी आदित्यनाथ के लिए अग्नि परीक्षा हैं उत्तर प्रदेश के चुनाव
- सुरेंद्र चतुर्वेदी- पहले बिहार और फिर पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में प्रचंड विजय के बाद भाजपा की असली अग्नि परीक्षा उत्तरप्रदेश में होनी है। उत्तर प्रदेश सहित उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। यूँ तो सारे ही चुनाव महत्वपूर्ण होते हैं लेकिन उत्तरप्रदेश का चुनाव देश की राजनीति को नई दिशा देने वाला सिद्ध होने वाला है। विशेष रूप से भाजपा के लिए यह चुनाव 2017 और 2022 से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषक पंजाब चुनाव पर ज़्यादा चर्चा कर रहे हैं लेकिन भारत की राजनीति की दिशा उत्तर प्रदेश के परिणामों से ही निर्धारित होगी।
राजनीति के जानकार योगी सरकार की क़ानून व्यवस्था, विकास और हिंदूवादी छवि के कारण बढ़त में मान रहे हैं लेकिन राम मंदिर में चंदा चोरी, ब्राह्मणों में नाराज़गी, भाजपा केडर में सुस्ती और मोदी - योगी ब्रांड में अतिवादी भरोसा ऐसे छोटे कारण हैं जो भाजपा के विजय रथ की गति को प्रभावित करने में सक्षम हैं। भाजपा की जीत अपनी संगठनात्मक क्षमता के बजाय मुस्लिम -यादव मतदाताओं में बिखराव और मायावती के दलित वोट बैंक के ध्रुवीकरण पर ज़्यादा केंद्रित है।
समाजवादी पार्टी ने भी मतदाताओं को लुभाने के लिए अपने आपको हिंदूवादी दिखाने का चतुराईपूर्ण प्रयास शुरू किया है लेकिन वह इसमें सफलता प्राप्त करेगी इसमें संदेह ही है, क्योंकि रामभक्तों पर गोलियाँ चलाने वाले पर हिंदू मतदाताओं के विश्वास करने का कोई कारण नहीं है। इसके उलट यदि उन्होंने ज़्यादा हिंदूवादी होने का नाटक किया तो मुस्लिम मतदाताओं के छिटक जाने का ख़तरा ज़्यादा है। ये मतदाता समाजवादी पार्टी से दूर होकर कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी यही चाहते हैं।
बिहार में राजद और बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस में यह समझ विकसित हुई है कि कांग्रेस का उदय क्षेत्रिय दलों के पराभव पर ही केंद्रित है। इसलिए राहुल गांधी की कोशिश रहेगी कि वो समाजवादी पार्टी के मतदाताओं को कांग्रेस की तरफ़ ले आयें, भले ही इसकी क़ीमत उन्हें समाजवादी पार्टी की हार से चुकानी पड़े।
यह चुनाव योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक कौशल की भी परीक्षा लेगा क्योंकि उनकी छवि एक कुशल प्रशासक की तो है पर इसे अजातशत्रु राजनेता के रूप में बदलने का अवसर आगामी विधानसभा चुनावों में ही मिलेगा, जहाँ सभी धड़ों के बीच अपने नेतृत्व को स्वीकार करा पाना मुश्किल चुनौती है।
योगी आदित्यनाथ को संगठनकर्ता के रूप में एक ऐसे मजबूत सहयोगी की आवश्यकता है जो भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित कर सके तथा रणनीतिक तौर पर योगी को संगठन के लिए अपरिहार्य बना सके। चाहे इसके लिए हिंदू वाहिनी को ठंडे बस्ते में ही क्यों ना डालना पड़े। नोटः लेखक सेंटर फॉर मीडिया रिसर्च एंड डेवलपमेंट जयपुर के निदेशक हैं।

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