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UP को AI, साइबर सिक्योरिटी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर मंथन से मिलेगी नई दिशा : CM योगी

आईआईटी कानपुर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईआईटी कानपुर का गौरवशाली इतिहास है। पिछले छह दशकों में इस संस्थान ने देश को तकनीक की दिशा में बहुत कुछ दिया है। हाल ही में मैंने नोएडा में ड्रोन टेक्नोलॉजी केंद्र का दौरा किया। वहां आईआईटी कानपुर से जुड़े लोग भी मिले। मैंने देखा कि हमारे युवा नई सामरिक चुनौतियों का सामना करने के लिए कैसे तैयार हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर भी उसमें अपना योगदान दे रहा है। हमें हमेशा यह विश्वास रखना चाहिए कि हम कर सकते हैं। दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला भी भारत में था। वहीं से चरक और सुश्रुत जैसे आयुर्वेदाचार्य निकले। यही हमारी परंपरा है कि हर अक्षर, हर वनस्पति और हर मनुष्य में कुछ बनने की क्षमता होती है। बस एक जोड़ने वाले की आवश्यकता होती है। मुझे विश्वास है कि आईआईटी जैसे संस्थान वही जोड़ने का काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 1947 में उत्तर प्रदेश का योगदान राष्ट्रीय जीडीपी में 14 प्रतिशत तक था। लेकिन, 2017 तक यह घटकर केवल 7-8 प्रतिशत रह गया। निराशा का माहौल था, उद्योग निवेश नहीं करना चाहते थे, युवा पलायन कर रहे थे। कभी समृद्ध रहा प्रदेश बीमारू कहलाने लगा। पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। आज प्रदेश, देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। बेहतर सुरक्षा, निवेश, बुनियादी ढांचा और सुशासन के साथ यूपी ने नए मानक स्थापित किए हैं। हर क्षेत्र में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने नेतृत्व किया है। प्रदेश की विधानसभा देश की पहली विधानसभा है, जिसने लगातार 36 घंटे चर्चा कर यह तय किया कि कैसे सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स पूरे किए जा सकते हैं। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन हर क्षेत्र में ठोस काम हो रहा है।
सीएम योगी ने बुंदेलखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी यह इलाका सूखे, पलायन और डकैतों की समस्या से जूझता था। आज यहां हर घर नल से जल पहुंच रहा है, खेतों तक सिंचाई हो रही है और डिफेंस कॉरिडोर के दो महत्वपूर्ण नोड (चित्रकूट और झांसी) में निवेश आ रहा है। फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट भी मान चुका है कि उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्र बढ़ा है। यही सतत विकास की ओर हमारे प्रयासों का प्रमाण है। साइबर सुरक्षा आज की सबसे बड़ी चुनौती है। 2017 में केवल दो साइबर थाने थे, वह भी सक्रिय नहीं थे। आज प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने हैं, 1,500 से अधिक थानों में साइबर डेस्क है और राज्य साइबर एवं फॉरेंसिक संस्थान की स्थापना भी हो चुकी है। लेकिन, अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इसी दिशा में हम आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर कार्य करना चाहते हैं।
--आईएएनएस
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