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यूपी में मेडिकल कॉलेजों में बनेंगे धर्मांतरण रोकथाम सेल, राज्यपाल ने दिया निर्देश

निर्देशों के अनुसार, इन धर्मांतरण रोकथाम सेल का काम छात्रों, रेजिडेंट डॉक्टरों, फैकल्टी और अन्य कर्मचारियों को संबंधित कानूनों और संस्थागत जिम्मेदारियों के बारे में जागरूक करना होगा।
इसके अलावा इन सेल को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी शिकायत को उचित तरीके से जांच के लिए आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
संस्थानों को जागरूकता अभियान और शैक्षणिक कार्यक्रम चलाने के लिए भी कहा गया है, ताकि छात्र और कर्मचारी कानून, अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जानकारी रख सकें।
सभी संबद्ध मेडिकल और डेंटल कॉलेजों को जल्द से जल्द ये सेल बनाने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट विश्वविद्यालय को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही, इन सेल में आने वाली किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई के लिए व्यवस्था बनाने को भी कहा गया है।
केजीएमयू धर्मांतरण मामला एक पूर्व जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर पर लगे आरोपों से जुड़ा है, जिसमें कहा गया है कि उसने महिला सहकर्मियों का शोषण कर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया। इस मामले की जांच एसटीएफ कर रही है और मेडिकल कैंपसों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
इसके अलावा एसजीपीजीआईएमएस की 21 वर्षीय युवती 21 मई से लापता है। परिवार ने एक व्यक्ति इरशाद अली पर अपहरण का आरोप लगाया है और दावा किया है कि उसने पीछा किया, ब्लैकमेल किया और हो सकता है कि उसे देश से बाहर ले जाया गया। इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।
कुछ मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इस पहल का समर्थन किया है और कहा है कि इस्लाम जबरन धर्म परिवर्तन की अनुमति नहीं देता, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी भी मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि राज्यपाल के ऐसे कदम से कोई आपत्ति नहीं है और जबरन धर्म परिवर्तन किसी भी धर्म में स्वीकार्य नहीं है।
--आईएएनएस
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