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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने हरियाणा के पर्यावरण-अनुकूल कदमों की सराहना की

सिफारिशों में हाउसिंग सोसाइटियों के लिए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को लागू करना, उद्योगों के लिए ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (ओसीईएमएस) और वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरण (एपीसीडी) स्थापित करना, स्मार्ट यातायात प्रबंधन को लागू करना और हरित गतिविधियों को अपनाना शामिल है।
यादव ने मृदा संरक्षण और जलस्तर बनाए रखने के लिए घास के मैदानों और वनक्षेत्रों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इस दिशा में राज्य में अच्छा काम किया गया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वन महोत्सव सिर्फ पौधे लगाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि प्रकृति का कर्ज चुकाने का एक मौका भी है।
उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया पर्यावरण संरक्षण की बात करती है, तो भारत ने हजारों साल पहले ही प्रकृति को पूजा का दर्जा दे दिया था।
सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'एक पेड़ मां के नाम' लगाने का मंत्र दिया है, जिसके तहत इस साल राज्य में अलग-अलग लोगों की भागीदारी से 1.4 करोड़ पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने कहा कि अरावली को फिर से हरा-भरा बनाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस साल के समारोह की खास बात यह थी कि हरियाणा के सभी जिलों में एक साथ जिला-स्तरीय वन महोत्सव कार्यक्रम आयोजित किए गए।
उन्होंने बताया कि इन कार्यक्रमों में राज्य के मंत्री, सांसद, विधायक, बोर्ड और निगमों के चेयरमैन, डिप्टी कमिश्नर और संबंधित जिलों के अन्य जन-प्रतिनिधि शामिल हुए।
मंच पर मौजूद गणमान्य लोगों में राज्य के पर्यावरण और वन मंत्री राव नरबीर सिंह, जन-प्रतिनिधि और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
--आईएएनएस
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