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एमएसएमई, मेक इन इंडिया और सनराइज सेक्टर्स को नई रफ्तार देगा केन्द्रीय बजट 2026 : प्रहलाद राय टांक

उन्होंने कहा कि जिसमें फिस्कल डेफिसिट कम करने, महंगाई कंट्रोल करने पर फोकस है और इसके साथ ही, बजट में हाई ग्रोथ का भी समन्वय है। ये बजट भारत की वैश्विक भूमिका को नए सिरे से सशक्त करता है। आज भारत के 140 करोड़ नागरिक, केवल सबसे तेजी से बढ़ती इकोनोमी बनकर ही संतुष्ट नहीं है, बल्कि मोदी जी के नेतृत्व में हम जल्द से जल्द दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना चाहते हैं।
आज भारत दुनिया में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। हाल ही में भारत ने कई बड़ी-बड़ी ट्रेड डील्स की हैं। इसी तरह का एक उदाहरण युरोपियन यूनियन के साथ हुई मदर ऑफ ऑल डील्स है। इन समझौतों का अधिकतम लाभ देश के युवाओं और हमारे लघु व मध्यम उद्योगों को मिले — इसी सोच के साथ केंद्रीय बजट में कई महत्वपूर्ण और बड़े कदम उठाए गए हैं।
टांक ने कहा कि बजट में मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई रफ़्तार के लिए महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया गया है। बजट में नई उभरती इंडस्ट्रीज़, यानी सनराइज सेक्टर्स को जिस मजबूती के साथ समर्थन दिया गया है, वो अभूतपूर्व है।
इस बजट के प्रमुख प्रावधानों में बायोफार्मा शक्ति मिशन, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम, रेयर अर्थ कॉरिडोर का निर्माण, क्रिटिक्ल मिनरल्स पर बल, टेक्सटाइल सेक्टर में नई स्कीम, हाई टेक टूल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, चैंपियन एमएसएमई तैयार करना है।
एमएसएमई, लघु और कुटीर उद्योगों को इस बजट में जो समर्थन मिला है, वह उन्हें लोकल से ग्लोबल बनने की नई ताकत देगा। किसी भी देश की सबसे बड़ी पूंजी उसके नागरिक होते हैं।
मेडिकल हब्स के निर्माण से, एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के माध्यम से, ऑरेंज इकोनॉमी यानी ऑडियो विजुअल्स, गेमिंग को बढ़ावा देकर, पर्यटन को प्रोत्साहन देकर, और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से, युवाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खुलेंगे। भारत को दुनिया का डेटा सेंटर हब बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को वर्ष 2047 तक टैक्स में छूट की घोषणा भी की गई है। यानि जो भी विदेशी कंपनी भारत में डाटा सेंटर स्थापित करेगी और भारत से दुनिया भर को क्लाउड/डेटा सेवाएँ देगी, उसे टैक्स हॉलिडे (टैक्स में छूट) दी जाएगी। बजट में टूरिज्म और विशेषकर नॉर्थ ईस्ट में टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कदम उठाए गए हैं।
टांक ने कहा कि केन्द्रीय वित्त मंत्री ने भारत विस्तार नामक एक नया बहुभाषीय एआई टूल प्रस्तावित किया है। यह टूल किसानों को कृषि से जुड़े संसाधनों तक आसान और डिजिटल पहुंच प्रदान करेगा। महिला सशक्तिकरण की बात करें तो हमारे देश में 10 करोड़ से ज्यादा महिलाएं राजीविका के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं, और बड़ा सफल अभियान रहा है। लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाते हुए क्लस्टर स्तरीय संगठनों के भीतर खुदरा आउटलेट के रूप में स्व-सहायता उद्यम (शी) मार्ट स्थापित किए जाएंगे।
हर जिले में छात्राओं के लिए नए हॉस्टल बनाने का अभियान भी शिक्षा को सुलभ बनाएगा। इस तरह राजस्थान के भी सभी 41 जिलों में छात्राओं के लिए छात्रावास खुलेंगे। भारत की कृषि, डेयरी सेक्टर, फिशरीज आदि को सरकार ने हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इस बजट में भी, नारियल, काजू, कोको और चंदन की पैदावार से जुड़े किसानों के लिए अनेक अहम कदम उठाए गए हैं।
पहला कर्तव्य है आर्थिक वृद्धि को तेज करना व बनाए रखना, दूसरा कर्तव्य है लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना और उनकी क्षमता का निर्माण करना, तीसरा कर्तव्य सबका साथ सबका विकास के विज़न से जुड़ा है। बजट में चैंपियन एमएसएमई के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया है। आत्मनिर्भर भारत निधि में 2000 करोड़ रुपए की और बढ़ोतरी की गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में 40 हजार करोड़ का प्रस्ताव रखा गया है।
टांक ने कहा कि सेमीकंडक्टर हब को लेकर पिछले बजट में इस क्षेत्र के लिए 22,500 करोड़ रुपये का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर सीधे 40,000 करोड़ रुपये करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा गया है। इस बजट की सबसे बड़ी घोषणा रक्षा क्षेत्र के लिए रही है, जहां मंत्रालय को 7.8 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
पिछले वर्ष के मुकाबले 14.5% की यह भारी बढ़ोतरी भारत की सैन्य ताकत को वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर ले जाने की प्रतिबद्धता दर्शाती है। सरकार का मुख्य विजन 'आत्मनिर्भर भारत' के तहत तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक स्वदेशी हथियारों और तकनीक से लैस करना है, ताकि देश की सीमाओं को अभेद्य बनाया जा सके। पशुपालन क्षेत्र को रिकॉर्ड स्तर का बजटीय समर्थन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की दिशा में बड़ा कदम है।
टांक ने कहा कि बजट 2026-27 में पशुपालन, डेयरी और पशुधन विभाग के लिए आवंटन लगभग 6,153 करोड़ रुपए किया गया है, जो पिछले वर्ष के ₹4,840 करोड़ की तुलना में लगभग 27% की वृद्धि है। इससे पशुपालन क्षेत्र को वित्तीय मजबूती और संसाधन मिला है। हाल ही में जीएसटी दरों में की गई कटौती से आमजन को महंगाई के मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है।
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