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भजनलाल सरकार में दस माह से रोजगार भत्ते को तरसे बेरोजगार

khaskhabar.com : मंगलवार, 11 जून 2024 3:06 PM (IST)
भजनलाल सरकार में दस माह से रोजगार भत्ते को तरसे बेरोजगार
Editor's Comment : राजस्थान में बेरोजगारी भत्ते को लेकर उठे इस विवाद ने सरकार के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। जनता की नाराजगी और विरोध के बीच, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार कैसे इस मुद्दे का समाधान करती है और युवाओं को राहत पहुंचाती है।


यहां से पढ़िए पूरी खबर

जयपुर। भजनलाल सरकार में प्रदेश के युवा बेरोजगार के भत्ते के लिए ही तरस रहे हैं। पेपरलीक और बेरोजगारी के मुद्दे पर सरकार में आई बीजेपी बेरोजगारी भत्ते के बिलों के भुगतान को लेकर सवालों के घेरे में है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मौजूदा भजनलाल सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने बेरोजगारी भत्ता रोक दिया है। इस मुद्दे पर सरकार को सोशल मीडिया पर भी भारी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

गहलोत का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर एक ट्वीट कर आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने बेरोजगारी भत्ते के बिलों को रोक रखा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल अगस्त से ही वित्त विभाग ने बेरोजगारी भत्ते के बिल रोक लिए थे, जो अब तक पेंडिंग चल रहे हैं। गहलोत ने लिखा : "राजस्थान में हमारी सरकार के दौरान युवाओं को 4500 रु महीने तक का बेरोजगारी भत्ता देना शुरू किया गया था जो उनके लिए बड़ा संबल होता है। मुझे बहुत सारे युवाओं ने बताया है कि बीते कई महीनों से उन्हें बेरोजगारी भत्ता नहीं मिल रहा है जिससे उन्हें अपनी पढ़ाई जारी रखने में परेशानी आ रही है।"

वित्त विभाग पर आरोप

गहलोत के आरोप के अनुसार, वित्त विभाग ने न केवल बेरोजगारी भत्ते के बिल रोके हैं, बल्कि पंचायतों को मिलने वाली ग्रांट, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, आरजीएचएस के भुगतान और आरटीई जैसी अहम योजनाओं के भुगतान भी रोक रखे हैं। इससे जनता में नाराजगी बढ़ रही है और यह नई सरकार के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है।

कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष का भी पलटवार


प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इस मुद्दे पर सरकार को झूठ बोलने और विपक्ष को गाली देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि छह महीने से अधिक समय हो गया है और अब सरकार का कोई विजन ही नहीं है। पूर्व मंत्री अशोक चांदना ने भी इस बारे में कहा कि उनकी सरकार में आचार संहिता लगने तक बेरोजगारी भत्ते के सारे बिल क्लीयर किए गए थे।

सरकार का पक्ष : धर्मपाल मीणा, निदेशक, रोजगार निदेशालय, ने कहा कि स्कीम चालू है और बिल बनाकर वित्त विभाग को भेजे जा चुके हैं, लेकिन ईसीएस पेंडिंग है।



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